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विधानसभा का विशेष सत्र औचित्यहीन, जनता के पैसे की बर्बादी: कांग्रेस का हमला

विधानसभा का विशेष सत्र औचित्यहीन, जनता के पैसे की बर्बादी: कांग्रेस का हमला
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देहरादून।उत्तराखंड विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर आयोजित एकदिवसीय विशेष सत्र पर कांग्रेस ने कड़ा हमला बोला है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक शर्मा और प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर इसे जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी बताया।

प्रेस वार्ता में आलोक शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है, इसके बावजूद भाजपा केंद्र और राज्य स्तर पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बिल को विशेष सत्र में लाया गया, वह वास्तव में परिसीमन संशोधन से जुड़ा था और इसका उद्देश्य सत्ता केंद्रीकरण था। विपक्ष की एकजुटता के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब महिला आरक्षण पर अंतिम निर्णय संसद को लेना है, तो राज्य में करोड़ों रुपये खर्च कर विशेष सत्र बुलाने का क्या औचित्य है। शर्मा के अनुसार इस सत्र पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगार युवाओं और आंदोलित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हित में उपयोग हो सकता था।

शर्मा ने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड महिला अपराध के मामलों में हिमालयी राज्यों में शीर्ष पर पहुंच गया है, लेकिन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड, नर्सिंग बेरोजगारों के आंदोलन और महिला पहलवानों के मुद्दे पर भी सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा महिलाओं के सशक्तिकरण की रही है, जिसका प्रमाण इतिहास में एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू और नेली सेनगुप्ता जैसी महिलाओं का नेतृत्व है। वहीं पंचायतों में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से महिलाओं को आरक्षण देकर जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण सुनिश्चित किया गया।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि धामी सरकार को जनता के पैसे को इस तरह खर्च करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।

दसौनी ने हाल ही में महिला पत्रकार मीना नेगी के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि यह महिलाओं की सुरक्षा के दावों की सच्चाई को उजागर करता है। उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण पर भी सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगाया।

उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं के हित में काम करना चाहती है, तो 2027 विधानसभा चुनाव में 33% टिकट महिलाओं को दे या सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण लागू करे।

प्रेस वार्ता में संगठन महामंत्री राजेंद्र भंडारी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रवक्ता अभिनव थापर, शीशपाल सिंह बिष्ट, दीप वोहरा और मनोज सैनी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

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