डॉ. ललित तिवारी बने डीन एजुकेशन, शिक्षाविदों ने दी बधाई

रिपोर्ट: ललित जोशी
नैनीताल, उत्तराखण्ड। सरोवर नगरी नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ललित तिवारी को डीन एजुकेशन (शिक्षा संकायाध्यक्ष) नियुक्त किया गया है। कुलपति के अनुमोदन के बाद कुलसचिव ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। उनकी नियुक्ति पर शिक्षाविदों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
डॉ. ललित तिवारी ने इस जिम्मेदारी के लिए कुलपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो दायित्व सौंपा गया है, उसका पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करेंगे।
डॉ. तिवारी उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह निदेशक शोध, निदेशक विजिटिंग प्रोफेसर, विशेष कार्य अधिकारी, इग्नू कार्यक्रम समन्वयक, राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक, उप परीक्षा नियंत्रक, बौद्धिक संपदा अधिकार समन्वयक और राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। वह पिछले 16 वर्षों से प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए डॉ. तिवारी को उत्तराखंड रत्न, टीचर ऑफ द ईयर, बेस्ट डायरेक्टर और डॉ. बीआर जैदी पुरस्कार सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका है। राष्ट्रीय सेवा योजना में योगदान के लिए उन्हें दो बार राज्यपाल के हाथों प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें देवभूमि उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिल चुका है।
शोध के क्षेत्र में डॉ. तिवारी की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। उनके 213 शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त उनके 15 पुस्तकें, 30 पुस्तक अध्याय और चार संपादित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह उत्तराखंड की संस्कृति पर आधारित 10 पत्रिकाओं का संपादन भी कर चुके हैं। उनके निर्देशन एवं सह-निर्देशन में 50 शोधार्थी पीएचडी तथा दो शोधार्थी एमफिल की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। उनके 60 से अधिक आमंत्रित व्याख्यान और 100 से अधिक लोकप्रिय लेख भी प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. तिवारी को रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी, लंदन, लिनियन सोसाइटी, लंदन और इंडियन बॉटनिकल सोसाइटी की फेलोशिप भी प्राप्त है। जैव विविधता, हिमालयी पर्यावरण और औषधीय पौधों के क्षेत्र में उनका शोध कार्य जारी है।
शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ डॉ. तिवारी पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा में भी योगदान दे रहे हैं। अब तक वह लगभग 50 हजार पौधों का रोपण कर चुके हैं और 20 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनकी नई नियुक्ति को शिक्षण, शोध और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।


