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ओडिशा पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर छापेमारी

ओडिशा पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर छापेमारी
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प्रति अभ्यर्थी 15 से 30 लाख रुपये में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप, मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच तेज

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने ओडिशा पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा-2024 के प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 9, 10 और 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल स्थित 12 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड, पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड तथा इन कंपनियों के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली गई। कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अभिलेख बरामद कर जब्त किए गए हैं। इनकी जांच की जा रही है।

ईडी के अनुसार, यह मामला अक्टूबर 2025 में ओडिशा पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। पुलिस ने 30 सितंबर 2025 को आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा पर स्थित इच्छापुरम के निकट तीन बसों को रोककर उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के 114 अभ्यर्थियों को पकड़ा था। आरोप था कि 5 और 6 अक्टूबर 2025 को प्रस्तावित परीक्षा का प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों को 15 लाख से 30 लाख रुपये प्रति व्यक्ति के बदले उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। बाद में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।

जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र लीक करने के कथित षड्यंत्र में परीक्षा आयोजन से जुड़ी कंपनियों के लोगों की भूमिका संदिग्ध थी। आरोप है कि उनके सहयोगियों ने अभ्यर्थियों से संपर्क कर रुपये के बदले गोपनीय प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का लालच दिया। अभ्यर्थियों से उनके मूल प्रमाणपत्र भी गारंटी के तौर पर लिए गए थे। सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, मार्च 2025 में जब इसी भर्ती परीक्षा का आयोजन पहले प्रस्तावित था, तब भी प्रश्नपत्र से संबंधित अनियमितताएं सामने आई थीं। बाद में ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने उस परीक्षा को रद्द कर दिया था।

ईडी की जांच में पता चला कि ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा आयोजन का काम केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम आईटीआई लिमिटेड को सौंपा था। आईटीआई लिमिटेड ने यह काम भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड को दिया। आरोप है कि सिलिकॉन टेकलैब के निदेशक सुरेश चंद्र नायक ने आईटीआई लिमिटेड की लिखित अनुमति के बिना अभ्यर्थियों की संवेदनशील जानकारी से संबंधित कार्य पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया। इस प्रक्रिया में पंचसॉफ्ट के निदेशक शंकर प्रस्टी की कथित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी के अनुसार, सिलिकॉन टेकलैब से जुड़े व्यक्तियों और शंकर प्रस्टी ने कथित तौर पर अभ्यर्थियों से संपर्क कर परीक्षा प्रश्नपत्र की गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। जांच में शंकर प्रस्टी और सिलिकॉन टेकलैब के बीच परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने से पहले हुए कई वित्तीय लेनदेन का भी पता चला है। इन लेनदेन को दोनों पक्षों के बीच संभावित मिलीभगत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ईडी की जांच में सिलिकॉन टेकलैब के स्वामित्व से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड, जिसे पहले पटनायक स्टील इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, और उसके निदेशकों समीर राठ तथा उनकी पत्नी स्वस्वती मिश्रा ने 5 अगस्त 2023 के कथित शेयर खरीद समझौते के माध्यम से सिलिकॉन टेकलैब में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की थी। हालांकि, जांच में पाया गया कि इस समझौते को दोनों कंपनियों में से किसी ने भी कंपनी रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया था। समझौते की वास्तविकता और उससे संबंधित परिस्थितियों की जांच जारी है।

जांच के अनुसार, सिलिकॉन टेकलैब में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण हासिल करने के बावजूद सुरेश चंद्र नायक कंपनी के निदेशक बने रहे। उन्होंने कथित तौर पर कंपनी की अनुमति के बिना आईटीआई लिमिटेड के साथ परीक्षा आयोजन को लेकर पत्राचार भी किया। आरोप है कि समीर राठ और स्वस्वती मिश्रा को सुरेश चंद्र नायक की अनधिकृत भूमिका की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने आईटीआई लिमिटेड को इसकी सूचना नहीं दी। बाद में सुरेश चंद्र नायक द्वारा कथित रूप से परीक्षा प्रश्नपत्र तक अनधिकृत पहुंच बनाए जाने का मामला भी जांच के दायरे में आया है।

ईडी के मुताबिक, अब तक की जांच और तलाशी में ऐसे अन्य व्यक्तियों, कंपनियों और संस्थाओं की संभावित भूमिका के संकेत मिले हैं, जिनकी भूमिका पहले जांच एजेंसियों की पड़ताल के दायरे से बाहर रही थी। इनमें ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड और अन्य कंपनियों से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के अधीन है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य प्रश्नपत्र लीक होने की सुनियोजित साजिश और अभ्यर्थियों से नकद धनराशि के रूप में अपराध से अर्जित आय जुटाए जाने की ओर संकेत करते हैं।

मामले में धन के लेनदेन, कंपनियों की भूमिका, प्रश्नपत्र तक अनधिकृत पहुंच और कथित अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।

देवभूमि खबर

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