
देहरादून। उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (ULMMC) द्वारा हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में आपदा-सक्षम विकास विषय पर आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यक्रम 02 फरवरी से 06 फरवरी, 2026 तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं वित्तीय प्रशासन अनुसंधान संस्थान, सुद्धोवाला, देहरादून में आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन यूएलएमएमसी द्वारा विश्व बैंक एवं नार्वेयन जियो टेक्निकल इंस्टीट्यूट के सहयोग से किया गया। पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों एवं तकनीकी पेशेवरों ने उत्तराखण्ड सहित संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं, नवीनतम शोध एवं आधुनिक तकनीकों पर गहन विचार-विमर्श किया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखण्ड एवं पूरे हिमालयी क्षेत्र में आपदा-सक्षम एवं जोखिम-संवेदनशील विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता ही आपदा जोखिम न्यूनीकरण की कुंजी है।
प्रशिक्षण के दौरान इस तथ्य को विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि उत्तराखण्ड जैसे भूस्खलन-संवेदनशील हिमालयी राज्यों में भूस्खलन पूर्वानुमान प्रणाली, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र तथा आधुनिक भू-तकनीकी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना अत्यंत आवश्यक है। इन वैज्ञानिक अवसंरचनाओं के माध्यम से भूस्खलन जोखिमों की पूर्व पहचान, समयबद्ध चेतावनी और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा सकता है।
विभिन्न सत्रों में यह भी बताया गया कि भूस्खलन पूर्वानुमान के लिए वर्षा-आधारित थ्रेशहोल्ड मॉडल, ढाल स्थिरता विश्लेषण, भू-वैज्ञानिक एवं भू-आकृतिक मानकों तथा संख्यात्मक मॉडलिंग का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। दीर्घकालिक और रियल-टाइम डेटा के एकीकरण से भूस्खलन संवेदनशीलता एवं जोखिम मानचित्रों को अधिक सटीक बनाया जा सकता है, जिससे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते एहतियाती कदम उठाए जा सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन दिवस को यूएलएमएमसी दिवस के रूप में समर्पित किया गया। इस अवसर पर यूएलएमएमसी द्वारा अपने वर्तमान दायित्वों, संगठनात्मक संरचना, प्रमुख उपलब्धियों एवं भावी दृष्टिकोण की प्रस्तुति दी गई। साथ ही संस्थागत मजबूती, वित्तीय मॉडल तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
समापन अवसर पर विश्व बैंक पोषित यू-प्रिपेयर परियोजना के निदेशक श्री आनंद स्वरूप ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार सहित श्री हाकोन हेयर्डाल, डॉ. जीन-सेबास्टियन लह्यूरू, सुश्री हाइडी हेफ्रे, डॉ. माल्टे फोगे, डॉ. स्पर्शा नागुला एवं डॉ. डोमिनिक लैंग सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

