केदारनाथ यात्रा 2026: 20 अप्रैल तक पूरी हों तैयारियां, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
रुद्रप्रयाग। आगामी 22 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा के सफल संचालन को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रभारी मंत्री गणेश जोशी ने रुद्रप्रयाग पहुंचकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और निर्देश दिए कि 20 अप्रैल तक सभी तैयारियां हर हाल में पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा सुरक्षा और व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में विभिन्न विभागों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने बताया कि यात्रा क्षेत्र को 3 सुपर जोन, 17 जोन और 47 सेक्टर में विभाजित किया गया है। ट्रैफिक प्रबंधन के लिए 2 सुपर जोन और 4 ट्रैफिक जोन बनाए गए हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ, फायर सर्विस, एनडीआरएफ, सीएपीएफ, बम निरोधक दस्ता और एंटी टेरर स्क्वॉड की टीमें तैनात रहेंगी।
यात्रा मार्ग पर सड़क और राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति की भी गहन समीक्षा की गई। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में चल रहे कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि पैचवर्क, डामरीकरण, क्रैश बैरियर और साइनेज का कार्य समय पर पूरा किया जाए, अन्यथा लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, रैन शेल्टर और नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। घोड़ा-खच्चर संचालन के लिए पंजीकरण, बीमा और पशु चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल, डॉक्टरों की तैनाती और एक्स-रे, ईसीजी जैसी सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी दी गई।
स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने यात्रा मार्ग पर शौचालयों, कूड़ा प्रबंधन और पर्यावरण मित्रों की तैनाती पर विशेष ध्यान देने को कहा। महिला यात्रियों की सुविधा के लिए सेनेटरी पैड डिस्पोजल और चेंजिंग रूम की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी की जाएगी।
बैठक में पार्किंग, पेयजल, बिजली, सोलर लाइट, संचार, आपदा प्रबंधन, होटल किराया नियंत्रण और एलपीजी आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संवेदनशील क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से साइनेज लगाने के निर्देश दिए गए।
प्रभारी मंत्री ने बताया कि इस वर्ष 4.50 लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं और संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। उन्होंने स्थानीय लोगों, प्रशासन और पुलिस से ‘अतिथि देवो भव’ की भावना से श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार करने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा के लिए तैयार किया जा रहा इंफ्रास्ट्रक्चर दीर्घकाल तक उपयोगी रहे, इस दृष्टि से कार्य किया जाए। विपरीत परिस्थितियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

