ऑनलाइन लेन-देन और सुरक्षित निवेश की जानकारी होना आवश्यकः प्रो. सुरेखा डंगवाल

ऑनलाइन लेन-देन और सुरक्षित निवेश की जानकारी होना आवश्यकः प्रो. सुरेखा डंगवाल
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देहरादून। दून विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में आज “ऑनलाइन ट्रांजेक्शन सिक्योरिटी और इन्वेस्टमेंट प्लानिंग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा उपाय और सुरक्षित निवेश के तरीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन लेन-देन जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, इसलिए इसकी सुरक्षा और समझदारीपूर्ण निवेश योजना हर नागरिक के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को समयानुकूल और व्यवहारिक विषयों पर जागरूक करना भी है। प्रो. डंगवाल ने विशेष रूप से कहा कि प्रतिभागियों को कार्यशाला में सीखी गई डिजिटल सुरक्षा और निवेश संबंधी जानकारी को व्यक्तिगत जीवन में अपनाना चाहिए और अपने परिवार एवं सहयोगियों के साथ साझा करना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री दुर्गेश डिमरी ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ शिक्षकों और कर्मचारियों को न केवल जानकारी देती हैं बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल भी प्रदान करती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि प्रतिभागी कार्यशाला में सीखे गए सुझावों और तकनीकों को अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन में लागू करें, जिससे उनका व्यक्तिगत और पेशेवर अनुभव अधिक सुरक्षित और प्रभावशाली बने।
इस अवसर पर एचडीएफसी शाखा प्रबंधक श्री विमल भंडारी के साथ श्री नवीन तिवारी, श्री रोहित शर्मा एवं श्री वरुण ने एचडीएफसी की विभिन्न योजनाओं पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने जमा खाता, ऋण सुविधा, हाउस लोन, वाहन लोन, बीमा योजना और म्यूचुअल फंड इत्यादि पर विशेष जानकारी दी। साथ ही ऑनलाइन लेन-देन की सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव के उपाय एवं तकनीकी सावधानियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि कुछ सरल सावधानियों के माध्यम से व्यक्ति अपने डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित रख सकता है और बेहतर आर्थिक भविष्य की योजना बना सकता है।
आईक्यूएसी के संयोजक प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ शिक्षकों और कर्मचारियों को समयानुकूल जानकारी प्रदान करती हैं और उन्हें व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक रूप से लाभान्वित करती हैं। उन्होंने एचडीएफसी बैंक के विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ वित्तीय साक्षरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
कार्यक्रम में स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के संकायाध्यक्ष प्रो. आर. पी. ममगाईं, डॉ. हर्ष डोभाल, डॉ. हिमानी शर्मा, डॉ. चारु द्विवेदी, डॉ. आशा राम गैरोला, डॉ. सरिता, डॉ. कोमल, श्री रोहित जोशी, डॉ. अंकित नागर, डॉ. शिवानी, डॉ. खुशबु सिंह, शिल्पी तिवारी, माधव नंद चमोली, संदीप रावत, श्री हिमांशु सहित विभिन्न संकायों के शिक्षक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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