सरस्वती विहार अजबपुर खुर्द में शिव महापुराण कथा के दशम दिवस पर पंडित सूर्यकांत बलूनी ने दिया कर्म, ज्ञान और भक्ति का संदेश

सरस्वती विहार अजबपुर खुर्द में शिव महापुराण कथा के दशम दिवस पर पंडित सूर्यकांत बलूनी ने दिया कर्म, ज्ञान और भक्ति का संदेश
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देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति एवं शिव शक्ति मंदिर प्रकोष्ठ अजबपुर खुर्द, देहरादून द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के दशम दिवस की कथा में कथा व्यास पंडित श्री सूर्यकांत बलूनी जी ने श्रद्धालुओं को कर्म, ज्ञान और भक्ति के महत्व पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने कहा कि कर्म को साधने के लिए व्रत, जप, तीर्थ, सेवा और पुण्यकर्म आवश्यक हैं। ज्ञान प्राप्ति के लिए शास्त्र अध्ययन, कथा श्रवण, गुरु एवं मातापिता की सेवा तथा सत्संग का अनुसरण करना चाहिए। भक्ति की वृद्धि के लिए पूजा, तीर्थयात्रा और अन्य धार्मिक आचरण महत्वपूर्ण हैं।

पंडित बलूनी ने कहा कि भगवान विभिन्न रूपों में — माला, पुस्तक/ग्रंथ, फोटो, मूर्ति, तुलसी, पीपल, गौमाता, गंगा आदि के रूप में — अवतरित होते हैं। उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंगों का मानव शरीर में प्रतीकात्मक स्वरूप बताते हुए कहा कि सोमनाथ मन है, श्रीशैल मल्लिकार्जुन बुद्धि है, शिर महाकाल है, मुखग्रीवा ऊँकार है, हृदय भीमाशंकर, उदर विश्वनाथ-अन्नपूर्णा, पीठ केदारनाथ, जंघा त्र्यंबकेश्वर, घुटने वैद्यनाथ, कटि नागेश, चरण रामेश्वरम और आसन (आधार) घुश्मेश्वर हैं।

इस अवसर पर श्री पंचम सिंह बिष्ट, श्री बीएस चौहान, श्री कैलाश राम तिवारी, श्री गजेंद्र भंडारी, क्षेत्रीय पार्षद श्री सोहन सिंह रौतेला, श्री मूर्ति राम विज्लवाण, श्री दिनेश जुयाल, श्री बीपी शर्मा, श्री अनूप सिंह फ़र्तियाल, श्री मंगल सिंह कुट्टी, श्री प्रेमलाल चमोली, श्री आशीष गुसांईं, श्री जयप्रकाश सेमवाल, श्री जयपाल सिंह बर्तवाल, श्री चिंतामणि पुरोहित, कैलाश रमोला, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, श्री ऋषभ पोखरियाल, श्री हिमांशु राणा, श्री प्रवीण कैंतुरा, श्री ध्यानचंद रमोला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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