मनोविज्ञान के विषय में विद्यार्थियों हेतु कौशल आधारित ज्ञान आवश्यक:प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल
देहरादून।दून विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग और थिएटर विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से युवा मनोवैज्ञानिक और विद्यार्थियों के लिए एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में इमोशंस को कैसे एक्सप्रेस किया जाता है एवम आवाज में स्पष्टता लाने के ऊपर अभ्यास कराया गया. इस कार्यशाला में 100 से ज्यादा प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने कहा कि संवेगों की अभिव्यक्ति के लिए रंगमंच सशक्त माध्यम है। यह विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है क्योंकि थियेटर में विद्यार्थी बहुत सारी गतिविधियों को विभिन्न संवेग के द्वारा अभिव्यक्त दर्शकों के मध्य करते हैं। जिससे उनका स्वयं का कैथार्सिस भी होता है और आत्मसम्मान भी बढ़ता है. साइकोलॉजिस्ट के लिए जरूरी है कि उनका कम्युनिकेशन स्किल बेहतर होने चाहिए जैसे की आवाज में स्पष्टता, शुद्धता एवं उचित शब्दों का प्रयोग। थिएटर में बहुत सारी तकनीकें होती है जिसके द्वारा आवाज और कम्युनिकेशन स्किल्स को निखारा जाता है। दून विश्वविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग विद्यार्थियों में मनोविज्ञान से संबंधित कौशल विकसित करने के लिए निरंतर कार्यशाला, सेमिनार और प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित करता रहता हैं ताकि विद्यार्थियों में स्किल बेस्ड नॉलेज बढ़ सके।
इस कार्यक्रम के रिसोर्स पर्सन, दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग की फैकल्टी डॉ अजीत पवार ने कहा कि अभिनय के द्वारा विभिन्न संवेग का जीवंत अनुभव किया जा सकता है जिसका लाभ यह होता है कि मनोवैज्ञानिक के अंदर विभिन्न विषयों को समझने के लिए एंपैथी बढ़ सकती है जिससे वह अपने क्लाइंट को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. रंगमंच में बहुत सी तकनीक होती है जिससे अभिव्यक्ति को निखारा जाता है।
इस कार्यक्रम के दौरान मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ सविता तिवारी कर्नाटक, डॉ राजेश भट्ट, डॉ कल्पना सिंह, रुचि नेगी, दीपक कुमार, आयुषी, अंजलि सुयाल एवं अन्य विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

