तत्कालीन ईओ नगर पंचायत केलाखेड़ा संजीव मेहरोत्रा को भ्रष्टाचार मामले में तीन साल की सजा, 20 हजार रुपये अर्थदंड

तत्कालीन ईओ नगर पंचायत केलाखेड़ा संजीव मेहरोत्रा को भ्रष्टाचार मामले में तीन साल की सजा, 20 हजार रुपये अर्थदंड
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हल्द्वानी। सतर्कता अधिष्ठान उत्तराखंड को बड़ी सफलता मिली है। नगर पंचायत केलाखेड़ा के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) संजीव मेहरोत्रा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने के 13 साल बाद अदालत ने दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, हल्द्वानी नैनीताल श्रीमती सविता चमोली की अदालत ने मेहरोत्रा को तीन वर्ष के साधारण कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

मामला वर्ष 2012 का है। शिकायतकर्ता सआदत हुसैन पुत्र स्व. मोहम्मद हनीफ निवासी वार्ड नंबर-4, केलाखेड़ा, तहसील बाजपुर, जिला ऊधमसिंह नगर ने 24 मई 2012 को सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह आर्मी में जम्मू-कश्मीर में तैनात है और केलाखेड़ा में उसकी एक बीघा 13 बिस्वा जमीन है, जिस पर उसका संयुक्त परिवार रहता है। मकान निर्माण कराने के लिए जब वह 26 अप्रैल 2012 को नगर पंचायत कार्यालय पहुंचा तो तत्कालीन ईओ संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि केलाखेड़ा में सभी मकान बिना नक्शे के बने हैं, यदि कुछ खर्चा करो तो मकान बना लो। इसके बाद उन्होंने उससे बीस हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने रिश्वत न देने पर ईओ द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने की बात भी बताई।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सतर्कता अधिष्ठान ने निरीक्षक तिलक राम वर्मा के नेतृत्व में एक टीम गठित की। 26 मई 2012 को रुद्रपुर में ट्रैप की कार्यवाही करते हुए टीम ने आरोपी संजीव मेहरोत्रा को शिकायतकर्ता से बीस हजार रुपये रिश्वत लेते समय रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी में मुकदमा अपराध संख्या 01/2012 धारा 7/13 (1), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत दर्ज किया गया। मामले की विवेचना निरीक्षक राजेंद्र सिंह हयांकी ने की और आरोप पत्र न्यायालय को भेजा।

अभियोजन की ओर से अभियोजन अधिकारी सुश्री सुनीता भट्ट ने अदालत में सात गवाह परीक्षित कराए। इस दौरान केस ऑफिसर निरीक्षक हेमचंद्र पांडे और कोर्ट पैरोकार कानि. राजेंद्र सिंह मेहरा ने सक्रिय भूमिका निभाई। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी संजीव मेहरोत्रा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में एक वर्ष का साधारण कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(1)(डी) सपठित धारा 13(2) में दो वर्ष का साधारण कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इस प्रकार कुल तीन वर्ष के साधारण कारावास और बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

सतर्कता अधिष्ठान ने आम जनता से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार की किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत साझा करें और ऐसे मामलों को नजरअंदाज न करें। भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए सतर्कता अधिष्ठान की टोल फ्री हेल्पलाइन 1064 और व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9456592300 पर 24×7 संपर्क किया जा सकता है।

देवभूमि खबर

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