अनुभवी चिकित्सक गैर-संचारी रोगों की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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देहरादून।देवभूमि खबर। स्वास्थ्य से जुड़े तत्कालीन मुद्दों पर चर्चा करने के लिये भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन के दो दिवसीय सालाना सम्मेलन में जुटे। इस मौके पर मौजूद कार्डियोलोजी, न्यूरोलोजी, नेफ्रोलोजी, ओंकोलोजी, गैस्ट्रोएंट्रोलोजी, बैरिएट्रिक सर्जरी और टीबी पल्मोनोलोजी से जुड़े विशेषज्ञ अपने विचार रखे। जबकि भारत की ओर से मौजूद प्रतिनिधियों ने बताया कि यहां स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के पास अभूतपूर्व प्रतिभा है।

भारत के ये अनुभवी चिकित्सक गैर-संचारी रोगों की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस सम्मेलन से पूर्व विभिन्न विषयों पर कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर डॉ प्रताप सी रेड्डी, चेयरमैन अपोलो होस्पिटल्स ग्रुप और ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन के संस्थापक अध्यक्ष ने कहा यह सम्मेलन विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारत के योगदान का जश्न है, देश के प्रतिभाशाली चिकित्सक दुनिया के लिए महत्वपूर्ण संसाधन की भूमिका निभाते हैं। गौरतलब है कि दुनिया गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, दिल की बीमारियों और कैंसर से जूझ रही है। गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए हर किसी का सहयोग अपेक्षित है। जबकि डॉ अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर, अपोलो होस्पिटल्स, सीनियर कन्सलटेन्ट, पीडिएट्रिक, गैस्ट्रो एंट्रोलोजिस्ट और हेपेटोलोेजिस्ट, मौजूदा उपाध्यक्ष एवं इनकमिंग प्रेजीडेन्ट, ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन ने कहा स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो भारत के पास अभूतपूर्व प्रतिभा है। भारत के ये अनुभवी चिकित्सक गैर-संचारी रोगों की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमें चीन, बांग्लादेश और रूस के मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षित करना होगा, ताकि वे लाइसेंस परीक्षा पास कर सकें और भारत में प्रैक्टिस कर सकें। हालही के वर्षों में विदेशों में चिकित्सा में अध्ययन करने वाले मात्र 18 फीसदी भारतीय छात्रों ने ही लाइसेंश्योर परीक्षा पास की है। डॉ नंदकुमार जयराम, महासचिव, ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन ने ऐलान किया कि ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन लीडर शिप अवॉर्ड फॉर कम्युनिटी सर्विस प्रोजेक्ट्स-डॉ प्रसाद राव निम्मा गादा, डॉ आशीष अनेजा, डॉ सुरेन्दर गुप्ता, डॉ लोकनाथ शांडिल्य, डॉ वी के राजू और प्रोफेसर पराग सिंघल को दिया जाएगा। वहीं डॉ सुधीर पारीख, संयुक्त सचिव ने ऐलान किया कि संस्था का लाईफटाईम अचीवमेन्ट अवॉर्ड डॉ एम.के. मणि को दिया जाएगा जो चेन्नई के अपोलो होस्पिटलस से प्रख्यात नेफ्रोलोजिस्ट हैं। डॉ रमेश मेहता, प्रेजीडेन्ट ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन और बापियो यूके ने कहा, ‘‘रीसर्च और इनोवेश्न के द्वारा भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया जा सकता है। देश में डॉक्टरों, नर्सों, टेकनिशियनों को कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि स्वास्थ्य सेवा कर्मियों की कमी को दूर किया जा सके।

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