आशा फैसिलिटेटरों ने भरी आंदोलन की हुंकार ,राज्य सरकार पर संगठन की मांगों का अनदेखी करने का लगाया आरोप

आशा फैसिलिटेटरों ने भरी आंदोलन की हुंकार ,राज्य सरकार पर संगठन की मांगों का अनदेखी करने का लगाया आरोप
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देहरादून। आशा फैसिलिटेटर एवं कार्यकर्ता संगठन उत्तराखंड से जुडी महिलाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि सरकार को बार-बार लिखित और मौखिक रूप से याद दिलाने के बावजूद भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जा रहा है। जिसके विरोध में आज 26 फरवरी को जैन धर्मशाला में एक प्रदेशस्तरीय महत्पूर्ण बैठक आयोजित हुई जिसमें संगठन से जुडी महिलाओं ने आगामी आंदालन की रूप रेखा पर चर्चा की। बैठक की मुख्य अतिथि भारतीय मजदूर संघ की केन्द्रीय महिला प्रभारी इंदु नायर ने सरकार पर महिलाओं का उत्पीडन करने का अरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य हो या केन्द्र की सरकार हो महिलाओं की जायज मांगों का समाधान करने के बजाया उनका शोषण कर रही है जो स्वीकार नहीं किया जायेगा।

शुक्रवार को जैन धर्मशाला में आयोजित बैठक में संगठन की प्रांतीय महामंत्री रेनू नेगी ने संचालन करते हुए बताया कि संगठन के केन्द्र के आहवान पर आगामी 9  मार्च को अपने-अपने जिलों में रैली निकाल कर मांग दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इस दौरान एक ज्ञापन प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जायेगा। इसके साथ ही एक जिले की रैली भी आयोजित की जाऐगी जिसमें प्रदेश भर की संगठन से जुडी तमाम महिलाऐं प्रतिभाग करेंर्गे। उन्होंने बताया कि आगे की आंदोलन पर रणनीति पर विचार किया जायेगा। उन्होंने सरकार को आडेहाथों लेते हुए कहा कि संगठन की लंबे समय से कुछ मांगे लंबित है जिसका अभी तक समाधान नहीं हो पा रहा है अगर सरकार उनकी यह मांग स्वीकर कर भी लेती है तो सरकार का इसमें ज्यादा खर्चा नही।

उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के द्वारा आशा फैसिलिटेटरों को कोविड के दौरान दौरान कार्य करने पर (1,000) एक हजार रुपये देने की घोषणा की थी जो आज तक नहीं मिल पाया है ।उन्होंने मुख्यमंत्री से उपरोक्त धनराशि को शीघ्र देने की मांग रखी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार व शासन स्तर से उनकी मांगों पर शीध्र विचार नहीं किया गया तो वह आर-पार की लडाई के लिए मजबूर हो जाएंगे। बैठक में संगठन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशा थापा ने भी अध्यक्षता करते हुए अपने विचार व्यक्त किए।

संगठन ने सरकार से मांग की है कि 30 दिन काम के एवज में 20 दिन का पैसा ही मिलता वो भी 300 रूपये ।आशा फैसिलिटेटर 20 विजिट करते है उसका कोई मानदेय नहीं दिया जाता है ।उसे बढ़कर 800 कर दिया जाय।।कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाती है उसमें अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमोंं करने पर 500 रुपया दिया जाए।कोविड-19 में किये गए कार्यों के लिए सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि दी जाए।

देवभूमि खबर

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