बागेश्वर-धूराफाट पट्टी के ग्राम सभा बोहाला में सातों आठों गवरा देवी की निकाली झांकी ,लोगों में दिखा खासा उत्साह
बागेश्वर। धूराफाट पट्टी के ग्राम सभा बोहाला व औसौ में सातों आठों का मेला सदियों से होते आ रहा है।बिगत वर्षों में कोरोना काल की महामारी से नहीं हो पाया।इस वर्ष बोहाला ग्राम सभा के जनप्रतिनिधियों ने महिला संगठन ने सातों आठों गवरा देवी पावन पर्व को धूमधाम से मनाने को लेकर की तैयारी भारी बारिश के कारण परवान नहीं चढ़ पाई। इस वर्ष भी बोहरा गांव हरजियू मंदिर में दो दिवसीय मेला नहीं हो पाया।
बोहला ग्राम सभा में बिरुण पंचमी से सातो तक झोडा चांचरी के द्बारा सातों आठों गवरा देवी महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाने की प्रथा है।फिर भी यहां की महिला समूह व क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों ने भारी बारिश के बाबजूद भी सातों आठों का गवरा देवी कार्यक्रम बड़े हर्षोल्लास व साज व महिलाओं ने कुमाऊं संस्कृति के पोषाक से बिधि बिधान से अपने ग्राम सभा से हरजियू मंदिर तक झांकी निकाली ।
प्रताप सिंह नेगी ने बताया पंचमी को पांच या सात अनाजों बिरुण से बना कर ताबे के बर्तन व मटके में भिगाया जाता है। सातवें दिन के दिन में बिरुण को धोकर बिधि बिधान से गवरा देवी व महेश्वर को मात्र शक्ति के पूजा अर्चना करके चढ़ाया जाता है। आठों के दिन बडी धूमधाम से साजा बाजा व कुमाऊं की संस्कृति से मंदिर में गवरा देवी व महेश्वर को नचाते हैं। उसके बाद किसी नौला या पानी या पीपल के पेड या कोई नदी में विसर्जन करते हैं। सातों आठों गवरा देवी को बिरुण पंचमी के द्धारा भी जाना जाता है।

