जीवन का उद्धार करने वाली है रामकथा-स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी

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हरिद्वार।देवभूमि खबर। म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि रामकथा जीवन का उद्धार करने वाली है। जिसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के अंतःकरण में ज्ञान का भण्डार प्रविष्ट हो जाता है। धर्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति परमात्मा की प्राप्ति कर सकता है। जयराम आश्रम में आयोजित श्रीराम कथा के विश्राम अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार वेदों और शास्त्रों ने मानव कल्याण के लिए विभिन्न प्रकार के मंत्र प्रदान किए हैं। उसी प्रकार रामकथा ने मानव मात्र के लिए आदर्श आचार संहिता प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम ने पिता की आज्ञा पालन करने के लिए राजवैभव का त्याग कर वनमार्ग की ओर प्रस्थान किया था। ठीक उसी प्रकार हमें अंदर के लोक प्रलोभन का त्याग कर अपने माता पिता के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। विभिन्न परिस्थितियों में मनुष्य को किस प्रकार का आचरण करना चाहिए। इसके लिए रामकथा एक आदर्श है। जयराम आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शो को अपनाकर अपने भीतर उत्तम चरित्र का निर्माण कर सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहना चाहिए। तभी व्यक्ति का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर रामकथा के श्रवण मात्र से ही जन्म जन्मांतर के पापों का शमन हो जाता है और गुरू गद्दी के सानिध्य में रामकथा के श्रवण का अवसर सौभाग्यशाली व्यक्ति को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की कथा आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाती है और व्यक्ति के जीवन में नए आयाम स्थापित करती है। निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम जन जन के आराध्य हैं। प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में विराजमान हैं। मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के जीवन चरित्र से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। कथा व्यास संत मुरलीधर महाराज ने कहा कि सरल चित्त से कथा श्रवण करने प्राप्त होने वाला आनन्द सीधे प्रभु चरणों में ले जाता है। हरिद्वार भगवान शिव की नगरी है। शिव साक्षात रूप से यहां विराजमान हैं। भगवान शिव को भी रामकथा अति प्रिय है। प्रभु श्रीराम की कथा सुनने मात्र से ही श्रद्धालु का जीवन भवसागर से पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि कथा श्रवण की सार्थकता तभी है। तब कथा से प्राप्त ज्ञान के अनुसार आचरण किया जाए। इस अवसर पर कथा यजमान रामदेव बोहरा, जयपाल, सुनील, मुदित, अंकुश शुक्ला, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, रामसिंह, रोहित सिंह आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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