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अक्षम्य अपराध है माँ गंगा को नहर बतानाः सतपाल महाराज

अक्षम्य अपराध है माँ गंगा को नहर बतानाः सतपाल महाराज
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देहरादून। कांग्रेस महासचिव हरीश रावत के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान हरिद्वार हर की पैड़ी स्थित गंगा माता को एक शासनादेश में नहर बताए जाने को प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व सिंचाई एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। श्री सतपाल महाराज ने कहा है कि हरीश रावत ने ऐसा करके जहां एक और गंगा माता में श्रद्धा और विश्वास रखने वाले असंख्य लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है वहीं दूसरी ओर उन्होंने बिल्डरों को लाभ देने के लिए गंगा माता को नहर बताकर तिलांजलि देने का भी काम किया है। प्रदेश के धर्मस्व मंत्री श्री सतपाल महाराज ने कहा कि कांग्रेसी नेता को समझना चाहिए कि गंगा को सभी माता माता कहकर बुलाते हैं। मां गंगा पौराणिक काल से ही पूजनीय और अटूट आस्था का केंद्र रही है। कांग्रेस नेता हरीश रावत को समझना चाहिए कि गुणवत्ता के मामले में गंगा का जल सभी नदियों में श्रेष्ठ होने के साथ-साथ सबसे शुद्ध है। श्री सतपाल महाराज ने कहा कि गंगाजल में बैक्टीरियोफेज नामक सबसे अधिक 1100 विषाणु होते हैं जो कि जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते। गंगाजल की इस अनुपम शुद्धिकरण क्षमता तथा असंख्य लोगों की आस्था का ही परिणाम है कि पवित्र नदी गंगा के जल को अमृत समान माना गया है। उन्होंने कहा कि मामला उजागर होने के बाद अब कांग्रेस नेता हरीश रावत अपने किए की माफी मांग कर आसानी से छुटकारा पाना चाहते हैं। गंगा की धारा तो कुछ लोगों के दबाव में आकर शासनादेश में नहर घोषित कर उन्होने एक अक्षम्य अपराध है। आश्चर्य होता है कि जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है? श्री सतपाल महाराज ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मांग की है माँ गंगा की महत्ता को देखते हुए नहर शब्द को तत्काल हटाया जाए।

देवभूमि खबर

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