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देहरादून में कम लिंगानुपात वाले गांव होंगे रेड जोन में चिह्नित, 218 अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी निगरानी

देहरादून में कम लिंगानुपात वाले गांव होंगे रेड जोन में चिह्नित, 218 अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी निगरानी
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देहरादून। जनपद में गिरते लिंगानुपात और कन्या भ्रूण के अवैध लिंग परीक्षण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने का निर्णय लिया है। कम लिंगानुपात वाले गांवों को रेड जोन में चिह्नित कर विशेष निगरानी की जाएगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्वास्थ्य विभाग को जनपद के सभी 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और गर्भवती महिलाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में लिंगानुपात की स्थिति और गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड का लिंगानुपात 939, जबकि देहरादून का 927 दर्ज किया गया। इस पर चिंता जताते हुए जिलाधिकारी ने प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर असामान्य स्थिति वाले क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कन्या भ्रूण का लिंग परीक्षण करना या कराना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के विरुद्ध अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को अल्ट्रासाउंड केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और 18 केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अनुमति देने से पहले उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की अनापत्ति, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण पत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण संबंधी अनुबंध की जांच की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों और आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति के बिना किसी भी केंद्र को पंजीकरण या नवीनीकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जनपद में वर्तमान में 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्र हैं, जिनमें 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित हैं। जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन समिति ने सितंबर माह में 84 केंद्रों और वर्ष 2026 में अब तक कुल 117 केंद्रों का निरीक्षण किया है। निरीक्षण के दौरान मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर तीन केंद्रों की मशीनें सील की गई हैं।

सीएमओ ने बताया कि जनपद का लिंगानुपात इस वर्ष 927 से बढ़कर 937 हुआ है। वर्ष 2026-27 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार डोईवाला में 885, सहसपुर में 924, रायपुर में 949, कालसी में 887, विकासनगर में 1000 और चकराता में 1060 लिंगानुपात दर्ज किया गया। डोईवाला और कालसी में स्थिति अपेक्षाकृत चिंताजनक पाई गई है।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बिमलेश जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, जिला शासकीय अधिवक्ता सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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