बाबा मोहन उत्तराखंडी के त्याग और बलिदान को कभी भुलाया नही जा सकता :उक्रांद
देहरादून । उक्रांद महानगर इकाई द्वारा उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आंदोलन के अग्रणीय,पृथक राज्य उत्तराखंड के लिये लंबे समय व सबसे ज्यादा अनशन करने वाले बाबा मोहन उत्तराखंडी की 16 वीं पुण्यतिथि पर पार्टी कार्यालय 10 कचहरी रोड़ देहरादून में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
बाबा मोहन उत्तराखंडी जी को श्रद्धांजलि देते हुई महानगर अध्यक्ष सुनील ध्यानी ने उनके जीवन संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा मोहन उत्तराखंडी का जन्म सन 1948 को चौन्दकोट पौडी गढ़वाल में स्व०श्री मनबर सिंह नेगी के घर पर हुआ। इंटर करने के पश्चात आई०टी०आई० की। बाबा मोहन उत्तराखंडी जी मे बंगाल इंजीनियरिंग में क्लर्क की नौकरी की लेकिन यह नौकरी उनको रास नही आयी। उन्होंने बताया कि बाबा मोहन ने सर्व प्रथम 11 जनवरी 1997 में देविधार लेन्सडॉन पौडी गढ़वाल में पृथक उत्तराखंड राज्य के लिये भूख हड़ताल की। इसके बाद राज्य की मांग व राज्य की राजधानी गैरसैंण के लिये भूख हड़ताल का सिलसिला जारी रहा। सबसे बड़ी भूख हड़ताल पृथक उत्तराखंड राज्य के लिये 38 दिन की बाबा मोहन उत्तराखंडी जी ने की। पृथक उत्तराखंड राज्य का जीवट योद्धा जो लगातार संघर्ष और आंदोलनों का प्रखर व्यक्ति रहा। जिनके संघर्षों को कभी नही भुलाया नही जा सकता। आज के नवयुवकों को उनके जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाबा मोहन उत्तराखंडी जी की अंतिम भूख हड़ताल राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने के लिये 2 अगस्त 2004 को वेनिताल आदि बद्री चमोली में शुरू हुई तथा इस अनशन के दौरान 8 अगस्त 2004 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
इस अवसर पर श्री लताफत हुसैन, जय प्रकाश उपाध्याय,प्रताप कुँवर, धर्मेंद्र कठैत,राजेन्द्र बिष्ट,विजय बौड़ाई,अशोक नेगी,राजेन्द्र प्रधान,ऋषि राणा राजेन्द्र प्रधान,भगवती डबराल,दुरेन्द्र रावत,नवीन भदूला आदि थे।


