देवताओं में सद्गुण रजोगुण तमोगुण गुण बांटे गए हैं :आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल

देवताओं में सद्गुण रजोगुण तमोगुण गुण बांटे गए हैं :आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल
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देहरादून।ईष्ट देव सेवा ट्रस्ट के तत्वधान में आयोजित दिव्य श्रीमद् देवी भागवत कथा के दूसरे दिन मां धारी देवी नागराजा उपासक आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल महाराज ने मां भगवती की कथा का प्रसंग सुनाया।

उन्होंने बताया कि मां भगवती के प्रभाव का वर्णन जिसमें मां सरस्वती मां लक्ष्मी एवं महाकाली नामक शक्तियों को भगवान ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश को प्रदान किया गया सद्गुण रजोगुण तमोगुण यह गुण भी देवताओं को क्रमश रूप में बांटे गए सतोगुण प्रति स्वरूप स्वच्छ सत्व गुण की प्रतीत होता है। रजोगुण रक्त वर्णमाला कहा जाता है विद्वान मनुष्य को इन लक्षणों के राजश्री श्रद्धा समझना चाहिए तमोगुण का वर्ण काला होता है यह मोह और विषाद उत्पन्न करता है दूसरों के दोषों को देखने का स्वभाव यह तामसिक श्रद्धा के लक्षण हैं, यह तीनों गुण एक दूसरे का उत्कर्ष होने की दशा में परस्पर विरोध करने लगते हैं।

तत्पश्चात महाराज ने नवरात्र व्रत विधान कुमारी पूजा कब प्रस्तुत वर्णन भक्तों को श्रवण कराया जिसमें महाराज श्री ने 9 दिन तक होने वाली नवरात्रों की पूजा का वर्णन एवं 1 वर्ष से 9 वर्ष तक की कन्याओं का नाम भी श्रवण कराया जो यह कर्म स्वरूप कर्म प्रधान देवी है प्रथम कुमारी, 2 त्रिमूर्ति, 3 कल्याणी, 4 रोहणी, 5 कालिका, 6चंडिका, 7 शांभवी, 8 दुर्गा और 9 सुभद्रा है। श्री राम चरित्र का वर्णन भी भक्तों को श्रवण कराया गया जिसमें सुंदर चौपाई एवं भजनों का समावेश कर भक्तों को झूमने पर विवश कर दिया। आज के मुख्य यजमान श्री भट्ट एवं कथा में आचार्य राजदीप भट्ट , मनोज धस्माना ,अंकित सुन्द्रियाल रहे।

देवभूमि खबर

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