त्रिवेंद्र सिंह रावत देश के सबसे खराब सीएम प्रदेश की छवि को नुकसान :भावना पांडे

त्रिवेंद्र सिंह रावत देश के सबसे खराब सीएम प्रदेश की छवि को नुकसान :भावना पांडे
Spread the love

देहरादून। राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल द्वारा किये गये सर्वे में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सबसे खराब मुख्यमंत्री बताए जाने पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए शर्म की बात है कि हमारे प्रदेश का मुख्यमंत्री सबसे फिसड्डी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएम त्रिवेंद्र रावत को आत्ममंथन करना होगा कि वो किस तरह से अपने शेष कार्यकाल को बेहतर बनाएं। इस सर्वे से प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचा है।

समाजसेवी भावना पांडे ने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं कि आप त्रिवेंद्र सिंह रावत के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करती। तो तब मैंने कहा था कि त्रिवेंद्र सिंह रावत न तो तीन में हैं और न तेरह में। वही बात साबित हुई हैै। दरअसल त्रिवेंद्र सिंह रावत को सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं है। वो आरएसएस से जुड़े रहे हैं। उनकी सरकार पूरी तरह से नौकरशाह चला रहे हैं। उनकी सरकार में नौकरशाह इतने अधिक शक्तिशाली हो गये हैं कि वो किसी मंत्री या नेता की भी नहीं सुनते। हाल में बागेश्वर पहुंचे कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की शिकायत इसका प्रमाण है कि उनके बागेश्वर पहुंचने पर प्रोटोकाल के हिसाब से डीएम और एसएसपी को मौजूद रहना चाहिए था, लेकिन दोनों ही अफसरों ने इसकी परवाह नहीं की।

भावना पांडे के अनुसार आज देश में उत्तराखंड के कई सितारे हैं। तीनों सेनाओं के अध्यक्ष जनरल विपिन रावत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत कई बड़े पदों पर उत्तराखंड के लोग सुशोभित हैं। ऐसे में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का देश का सबसे खराब सीएम हमारे प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। उत्तराखंड में नित नये भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो रहे हैं। कोरोना टाइम में राशन घोटाला, साइकिल घोटाला, भेड़ घोटाला, मनी लांड्रिंग, एनएच घोटाला, जमीन-घोटाला आदि घोटाले उजागर हो रहे हैं। उनका कहना है कि अभी तो सबको पता है कि मरने के बाद साथ कुछ नहंी जाएगा, तब ये हाल है, यदि इन नेताओं को पता चल जाए कि सब साथ जाएगा तो क्या होगा?

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि हमारे प्रदेश के नेता हेमवती नंदन बहुगुणा और गोविंद वल्लभ पंत रहे जैसे दिग्गज नेता रहे हैं जो प्रधानमंत्री पद की होड़ में थे लेकिन नार्थ-साउथ, हिन्दू-मुस्लिम, गढ़वाल-कुमाऊं, ब्राहमण-ठाकुर यानी जातिवाद और क्षेत्रवाद के कारण वो पीएम नहीं बन सके। उन्होंने कहा कि नेता जनता को जाति और धर्म के आधार पर बरगला देते हैं और जनता भ्रमित हो जाती है। ऐसे में नेताओं के स्वार्थ की पूर्ति होती है और जनता ठगी रह जाती है।

भावना ने उत्तराखंड के युवाओं और महिलाओं से अपील की है कि वो जातिवाद और क्षेत्रवाद को छोड़कर संगठित हो जाएं और राष्ट्रवाद की मुहिम में चलाएं ताकि हम अपने राज्य को सर्वश्रेष्ठ और विकास की होड़ में सबसे अव्वल बना सकें। उन्होंने पूर्व सैन्य अफसर, पूर्व नौकरशाहों, बुद्धिजीवियों से अपील की कि वो राज्यहित में एकजुट हों और उनके सलाहकार और संरक्षक मंडल में शामिल हो कर भावी पीढ़ी के लिए बेहतर उत्तराखंड बनाने की दिशा में काम करें।

देवभूमि खबर

Related articles