अशोक खत्री को राज्य मंत्री बनाये जाने पर क्षेत्रीय जनता ने जताया सीएम का आभार 

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रुद्रप्रयाग।देवभूमि खबर। प्रदेश की भाजपा सरकार ने आखिर दो वर्ष बाद लोक सभा चुनाव से पूर्व लाल बत्ती का पिटारा खोलते हुए अपने कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपकर बड़ा दांव चला है। दायित्व बांटने में दो वर्ष का समय लगाने से लगता है सरकार एवं संगठन ने इसके लिए बहुत होमवर्क किया है। हालांकि सभी कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना टेडी खीर है, फिर भी संगठन एवं सरकार ने संतुलन बनाये रखते हुए दायित्वों को सौंपा है।

दायित्व सौंपकर भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पूर्व अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंककर पहली बढ़त हासिल कर ली है। दायित्वों की कड़ी में केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता एवं अगस्त्यमुनि के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक खत्री को बद्री-केदार मन्दिर समिति का उपाध्यक्ष बनाकर एक तीर से कई निशाने साधने का काम किया है। पहली बार केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र से मंदिर समिति में किसी को इतना बड़ा दायित्व मिला है। पहले भी कई बार मंदिर समिति में क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात उठती रही है, लेकिन पहले की सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। यूं तो अशोक खत्री को दायित्व दिए जाने की अटकलें भाजपा सरकार बनने के साथ ही लगने लगी थी, मगर जब सरकार ने दायित्वों की पहली लिस्ट जारी की तो उसमें उनका नाम नदारद था। यह क्षेत्र और उनके समर्थकों के लिए भी अचरज की बात थी। क्योंकि उनका पार्टी संगठन एवं सरकार के मुखिया के साथ न केवल मधुर संबंध हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय सांसद भुवन चन्द्र खण्डूड़ी के भी नजदीकी माने जाते रहे हैं। यह नजदीकियां ही उनको दायित्व मिलने में सहायक नहीं रही हैं, बल्कि पार्टी में निरंतर सक्रिय रहकर संगठन में कई पदों को सुशोभित करते हुए दी गई जिम्मेदारी का ईमानदारी से वहन करने के कारण से भी मिली है। 1968 में जन्मे अशोक खत्री की प्राथमिक से एमएससी की शिक्षा अगस्त्यमुनि में हुई। प्रारम्भ से ही वे भारतीय जनता युवा मोर्चे से जुड़े रहे और 1991-93 तक भाजयुमो का मण्डल अध्यक्ष तथा 1993-95 तक तत्कालीन चमोली जिले का अध्यक्ष रहे। जनपद बनने के बाद वे 1997-2003 तक भाजपा जिला महामंत्री का दायित्व संभाला तथा 2000-02 तक भाजपा की अंतरिम सरकार ने उन्हें उत्तराखण्ड वन विकास निगम के निदेशक का दायित्व दिया। वर्ष 2008 में उन्होंने जिपं का चुनाव लड़ा। 2013 में अगस्त्यमुनि नगर पंचायत के गठन के बाद हुए पहले चुनाव में संगठन ने उन्हें अध्यक्ष पद पर लड़ाया और उन्होंने पूरे प्रदेश में रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की। उन्होंने नगर पंचायत में अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में अभूतपूर्व कार्य किए, जिसके फलस्वरूप नगर पंचायत को स्वच्छता में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। संवेधानिक पद पर उनकी निर्विवाद कार्यप्रणाली एवं निर्णय लेने की क्षमता के कायल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं। दायित्व दिलवाने में यह भी उनका प्लस प्वाइंट रहा। यही नहीं वर्ष 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में विधायक के लिए उनका दावा सबसे मजबूत था, मगर टिकट नहीं मिल पाया। वर्ष 2017 में भी उनका दावा सबसे मजबूत रहा, लेकिन उस समय कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आई शैलारानी रावत को ही भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया। बार बार टिकट कटने के बावजूद उन्होंने पार्टी से मिले निर्देशों का पालन किया। जो उनकी पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता दिखाती है। यूं तो इस क्षेत्र से कई कार्यकर्ता दायित्व की चाह रखे हुए थे, लेकिन संगठन एवं सरकार ने अशोक खत्री को दायित्व देकर साबित किया है कि पार्टी में समर्पित कार्यकर्ता की अनदेखी नहीं की जाती है। यदि अशोक खत्री ने मंदिर समिति का उपाध्यक्ष रहते हुए क्षेत्र के विकास में नई इबारत लिखी तो 2022 के विधानसभा के लिए उनका दावा और भी मजबूत होगा।
अशोक खत्री का कहना है कि वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता हूंॅ। पार्टी जहां कहेगी मैं वहां कार्य करूंगा। पार्टी ने मन्दिर समिति में उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है। मेरा प्रयास रहेगा कि यात्रियों की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हो, जिससे अधिक से अधिक यात्री यहां पहुंचे। इससे न केवल मन्दिर समिति की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय जनता की आर्थिकी भी सुधरेगी। स्थानीय बेरोजगारों को मन्दिर समिति की ओर से रोजगारपरक पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिलवाने के साथ ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में योजनायें बनाई जायेंगी।

देवभूमि खबर

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