भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा आयोजित मानक मंथन में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तरीकों पर हुई चर्चा
देहरादून। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में एक विशेष “मानक मंथन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के उन्नत और वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की गई। एमडीडीए, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए आयोजित इस संवेदीकरण कार्यक्रम में डेढ़ सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य सॉलिड वेस्ट के प्रबंधन में मानकों को समझना और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया को सरल बनाना था।
कार्यक्रम का आयोजन एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमडीडीए के अधीक्षण अभियंता एचसीएस राणा थे, जिन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों को सरकारी विभागों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इससे फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को न केवल काम में सहायता मिलेगी, बल्कि वे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के वैज्ञानिक तरीकों से बेहतर तरीके से परिचित हो सकेंगे, जो उनके काम को और भी प्रभावी बनाएगा।
बीआईएस देहरादून शाखा के निदेशक व प्रमुख सौरभ तिवारी ने बताया कि बीआईएस के पास सिविल इंजीनियरिंग विभाग की अलग इकाई है, जिसमें 39 तकनीकी कमेटियां काम कर रही हैं। इन कमेटियों का कार्य विभिन्न मानकों को विकसित करना और उन्हें क्षेत्र में लागू करना है। तिवारी ने फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों से उनके सुझाव भी आमंत्रित किए, ताकि उनके अनुभवों के आधार पर नए मानक बनाए जा सकें। उन्होंने बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अलावा, ग्रीन बिल्डिंग के मानकों पर भी चर्चा की जा रही है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद जरूरी हैं।
कार्यक्रम में नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) 2016 पर भी विस्तृत चर्चा की गई। भारतीय मानक ब्यूरो की एनबीसी 2016 कमेटी के सदस्य अमोर कूल ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभाग किया और इस कोड के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसी भी परियोजना की शुरुआत से ही अगर ग्रीन बिल्डिंग के मानकों का पालन किया जाए, तो उससे पर्यावरण को बेहतर लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा, हरियाणा वॉटर रिसोर्स अथॉरिटी के सदस्य संजय मरवाह ने रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर ऑनलाइन माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने जल संरक्षण के इस तरीके को व्यापक रूप से अपनाने पर जोर दिया। साथ ही वैज्ञानिक भाविक भूपतभाई राजगोर ने वेस्ट डिस्पोजल और मैनेजमेंट पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने वेस्ट मैटेरियल्स की रिसाइक्लिंग के विभिन्न तरीकों पर विस्तार से चर्चा की, ताकि कचरे के निपटान की समस्या को प्रभावी रूप से सुलझाया जा सके।
कार्यक्रम के अंत में बीआईएस के वैज्ञानिक सचिन चौधरी ने सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में सीपेट के प्रमुख अभिषेक राजवंश भी उपस्थित थे, जिन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में नए-नए तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
