गंभीर प्रवृत्ति के मुकदमे वापस लेना प्रदेश में अपराध बढ़ने का कारण: रघुनाथ सिंह नेगी
#हत्या का प्रयास, जालसाजी, लूट-खसोट, फर्जीवाड़ा में सरकारों को दिखा ‘जनहित’ #कठपुतली बन चुके राजभवन से मामलों में हस्तक्षेप की मांग
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि प्रदेश में लूट-खसोट, जालसाजी, फर्जीवाड़ा, हत्या का प्रयास, कूट रचित दस्तावेज बनाकर लोगों की संपत्ति हड़पने, जबरन भूमि कब्जा करने और फर्जी डिग्रियां हासिल करने जैसे मामलों में सरकारों को केवल ‘जनहित’ दिखता है। इसी वजह से प्रदेश में माफियाओं, बदमाशों और अपराधियों की संख्या में लगातार इजाफ़ा हुआ है।

रघुनाथ नेगी ने कहा कि लगभग सभी सरकारें इन मामलों में सॉफ्ट कॉर्नर रखती रही हैं। सरकार धारा 321 के तहत केवल जनहित में ही मुकदमा वापस ले सकती है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। जनता के हित में किए गए आंदोलनों के मामले ही जनहित मानकर मुकदमा वापस लिया जा सकता है, जबकि बदमाशों के मुकदमे ही वापस किए जा रहे हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि इन मुकदमों में अभियोजन, पुलिस और प्रशासन सभी ने मुकदमे वापसी का विरोध किया, लेकिन सरकारों द्वारा नियम-कानून को तोड़ा गया। सरकार द्वारा मुकदमा वापस लेने से उन प्रभावित व्यक्तियों के साथ अन्याय होता है, जिन्होंने लुटेरे और अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था।
नेगी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने भी नवंबर 2012 में एक जनहित याचिका के आदेश में संबंधित न्यायालयों को सरकार द्वारा लिए गए मुकदमे वापसी के मामलों में केवल धारा 321 (जनहित संबंधी) मामलों में ही जनहित का ध्यान रखते हुए केस डिसाइड करने के निर्देश दिए थे।
इस संबंध में मोर्चा ने कल ही राजभवन से, जो वर्तमान में सरकार की कठपुतली बन चुका है, गंभीर प्रवृत्ति के मुकदमे वापस लेने के मामलों में सरकार को हिदायत देने और उचित निर्देश जारी करने की मांग की है।

