टिहरी : आखिर किसके सिर सजेगा कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कांटों भरा ताज
टिहरी।कांग्रेस पार्टी आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने जनपदों में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी में जुटी है। इसी क्रम में टिहरी जिले में नया जिलाध्यक्ष नियुक्त करने को लेकर मंथन जारी है।
हालांकि जातीय समीकरण और संगठन के आंतरिक संतुलन के चलते यह प्रक्रिया फिलहाल कुछ दिनों के लिए और टलती दिख रही है। सूत्रों के अनुसार, इस माह के तीसरे सप्ताह में दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय इंदिरा गांधी भवन में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और संबंधित जिलों के पर्यवेक्षकों ने नामों पर चर्चा की थी। बैठक में लगभग सभी जिलाध्यक्षों के नाम तय माने जा रहे थे, लेकिन प्रदेश नेतृत्व के साथ हुई अंतिम बातचीत में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के कारण सूची उलझ गई है।
टिहरी जनपद के लिए छह दावेदारों के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं जिनमें वर्तमान जिलाध्यक्ष राकेश राणा, भिलंगना के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और प्रदेश महासचिव विजय गुनसोला, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुरारी लाल खंडवाल, जिला प्रवक्ता जयवीर सिंह रावत, अधिवक्ता आनंद सिंह बैलवाल और पूर्व शहर अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल शामिल हैं। राकेश राणा लगातार दूसरी बार जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। संगठन में गहरी पैठ, अनुभव और कार्यशैली के चलते उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उनके पिछले कार्यकाल की संगठनात्मक मजबूती और विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता उनके पक्ष में अहम मानी जा रही है। हालांकि कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति पांच वर्ष या लगातार दो बार से अधिक अध्यक्ष नहीं रह सकता, जिसके कारण हाईकमान उनके मामले में विशेष मंथन कर रहा है।
वहीं विजय गुनसोला जो भिलंगना के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हैं, संगठन पर उनकी पकड़ और राजनीतिक अनुभव के चलते भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पंचायत राजनीति में गहरी समझ रखने वाले और अनुसूचित जाति से कांग्रेस का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले मुरारी लाल खंडवाल भी इस दौड़ में मजबूती से शामिल हैं। जिला प्रवक्ता जयवीर सिंह रावत, अधिवक्ता आनंद सिंह बैलवाल और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहे देवेंद्र नौडियाल भी अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं और संगठन में नई ऊर्जा के प्रतिनिधि चेहरों के रूप में देखे जा रहे हैं।
जिले में वर्तमान में कांग्रेस के पास केवल प्रतापनगर विधानसभा सीट है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नए जिलाध्यक्ष का चयन पार्टी के लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष का यह कांटों भरा ताज आखिर किसके सिर सजेगा — अनुभवी नेतृत्व के पास रहेगा या नई ऊर्जा को मौका मिलेगा।
