संस्कृति, समझ और संवाद से रुकेगा रिश्तों में बिखराव — गंगधारा 2.0 में प्री-वेडिंग काउंसलिंग पर विशेषज्ञ और प्रतिभागी एकमत

संस्कृति, समझ और संवाद से रुकेगा रिश्तों में बिखराव — गंगधारा 2.0 में प्री-वेडिंग काउंसलिंग पर विशेषज्ञ और प्रतिभागी एकमत
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देहरादून। गंगधारा–2.0 के मंच पर शनिवार को टूटते वैवाहिक रिश्तों की रोकथाम और प्री-वेडिंग काउंसलिंग की आवश्यकता पर खुलकर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने विवाह जैसी जिम्मेदारीपूर्ण संस्था की मजबूती के लिए संस्कृति, समझ और संवाद को प्रमुख आधार बताया।

शुक्रवार को हरिद्वार रोड स्थित संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में देवभूमि विकास संस्थान और दून विश्वविद्यालय द्वारा गंगधारा के द्वितीय संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम “प्री-वेडिंग काउंसलिंग—समझ और संवाद” थी। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यूसी ध्यानी ने कहा कि विवाह संबंधों को लेकर कानूनी प्रावधान सीमित समाधान देते हैं। रिश्तों की वास्तविक मजबूती सांस्कृतिक मूल्यों और समन्वय पर ही संभव है।

देवभूमि विकास संस्थान के संरक्षक और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रस्तावना रखते हुए कहा कि हम उस संस्कृति के संवाहक हैं जो समन्वय सिखाती है। उन्होंने कहा कि आज समाज में रिश्तों में दरारें बढ़ रही हैं और ऐसे समय में युवाओं की सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि भारत में विवाह से पहले परामर्श की आवश्यकता कभी नहीं रही, लेकिन समय बदलने के साथ यह जरूरी दिखाई देने लगा है। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल ने प्री-वेडिंग काउंसलिंग को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता बताई। सत्र की अध्यक्षता उत्तरांचल लॉ कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश बहुगुणा ने की और संचालन दून विश्वविद्यालय के प्रो एचसी पुरोहित ने किया।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो विजय धस्माना ने वैवाहिक संबंधों की मजबूती को अपने माता-पिता के उदाहरण से समझाया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता की उम्र में 11 वर्ष का अंतर था, विचार अलग थे और एक-दूसरे को देखे बिना विवाह हुआ था, लेकिन समर्पण और समन्वय के कारण वे एक आदर्श दंपति बने। कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, बृजभूषण गैरोला, श्रीमती सविता कपूर, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, कृति रावत, सतेंद्र नेगी, उमेश्वर रावत, डॉ दीपक भट्ट और प्रमोद रावत सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के संवाद सत्र में विषय विशेषज्ञों और छात्रों के बीच अहम विमर्श हुआ। विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सवाल पूछे। मनोवैज्ञानिक डॉ आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ विक्रम रावत, अमन कपूर, डॉ मालिनी श्रीवास्तव, एडवोकेट रवि नेगी और सहकारिता विभाग की महाप्रबंधक रामेंद्री मंद्रवाल ने छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि विवाह संस्था अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों से संचालित होती है। प्री-वेडिंग काउंसलिंग इसलिए जरूरी है ताकि विवाह से पहले अपेक्षाओं का स्पष्ट निर्धारण हो सके। इस सत्र का संचालन प्रो राजेश भट्ट ने किया।

चिपको आंदोलन की प्रणेता स्व. गौरा देवी के शताब्दी वर्ष और जनजाति दिवस की छाप भी कार्यक्रम पर दिखाई दी। कार्यक्रम स्थल पर गौरा देवी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पोस्टर लगाए गए थे। डीएवी पब्लिक स्कूल डिफेंस कॉलोनी के बच्चों ने उत्तराखंड की जनजातियों पर आकर्षक प्रस्तुति देकर सभी का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम में लंबा और सफल वैवाहिक जीवन जीने वाले पांच आदर्श दंपतियों—राकेश ओबराय, वीरेंद्र सिंह कृषाली, जगमोहन सिंह राणा, मनोहर सिंह रावत और खुशहाल सिंह पुंडीर—को सम्मानित किया गया।

अंत में अतिथियों ने दो पुस्तकों—“गंगधारा: संस्कृति से सतत विकास” (लेखक प्रो सुरेखा डंगवाल एवं प्रो सुधांशु जोशी) और प्री-वेडिंग काउंसलिंग पर आधारित प्रो राजेश भट्ट की पुस्तक—का विमोचन किया। कार्यक्रम में देवभूमि विकास संस्थान की मेन ट्रस्टी कृति रावत द्वारा सर्वे रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।

देवभूमि खबर

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