राज्य आंदोलनकारियों में नाराजगी — मुख्यमंत्री की घोषणा को एक महीना बीतने के बाद भी शासनादेश जारी न होने पर प्रदर्शन की चेतावनी
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के पदाधिकारियों की राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को लेकर देर सायं दर्शनलाल चौक पर समीक्षा की गई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी और महासचिव रामलाल खंडूड़ी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को एक माह हो गया है, लेकिन शासनादेश जारी होना तो दूर की बात है, अभी तक घोषणा पर अनुमोदन तक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बिल्कुल उलट गत माह हुए दो–तीन धरना प्रदर्शनों पर 24 से 48 घंटे के भीतर शासनादेश जारी कर दिए गए। सरकार की शहीदों के परिजनों एवं राज्य आंदोलनकारियों के प्रति गंभीरता का स्तर शासन की कार्यशैली से स्पष्ट होता है।
महासचिव रामलाल खंडूड़ी एवं सतेन्द्र भण्डारी ने कहा कि लगातार राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होगी क्योंकि न 10% क्षैतिज आरक्षण का लाभ सभी राज्य आंदोलनकारियों को मिल रहा है और न ही वर्षों से लम्बित चिन्हीकरण के मामलों का निस्तारण किया जा रहा है। शहीदों के परिजन व आश्रित अपने बच्चों की सुविधा हेतु इस आरक्षण व पेंशन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। यदि शीघ्र घोषणाओं का शासनादेश जारी नहीं किया जाता तो शीघ्र बड़ी बैठक बुलाकर अगली रणनीति तय की जाएगी।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि 13 दिसम्बर को लगातार बिगड़ती हुई स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को देखते हुए सुबह 11 बजे दून चिकित्सालय में धरना एवं प्रदर्शन किया जायेगा। बैठक में केशव उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, सतेन्द्र भण्डारी, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, गणेश डंगवाल, धर्मपाल रावत, मनोज नौटियाल एवं राकेश नौटियाल, नरेन्द्र नौटियाल व राजेश पान्थरी व बलबीर नेगी आदि उपस्थित रहे।

