जेलों में डिजिटल चेस्ट एक्स-रे से टीबी जांच की शुरुआत, टीबी मुक्त भारत अभियान को मिला बल

जेलों में डिजिटल चेस्ट एक्स-रे से टीबी जांच की शुरुआत, टीबी मुक्त भारत अभियान को मिला बल
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देहरादून। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 17 अप्रैल से जिला कारागार देहरादून में डिजिटल चेस्ट एक्स-रे के माध्यम से टीबी जांच की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में जेल प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस दौरान डीआईजी जेल श्री दधीराम मौर्य, जेलर श्री पवन कोठारी, डीडी टीआई यूकेसैक्स के श्री संजय बिष्ट, मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकित गोसाईं तथा चीफ फार्मेसिस्ट श्री गेरोला ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।

यह पहल राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत सेंट्रल टीबी डिवीजन, NACO, उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति, स्टेट प्रिजन विभाग एवं जिला टीबी प्रभाग के सहयोग से लागू की जा रही है। प्रधानमंत्री की टीबी मुक्त भारत की परिकल्पना और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में इस अभियान को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।

ग्लोबल फंड GC-7 के तहत प्रिजन एवं अन्य बंद स्थान कार्यक्रम के अंतर्गत हैंडहेल्ड डिजिटल चेस्ट एक्स-रे मशीनों के माध्यम से जांच शुरू की गई है। इस कार्यक्रम का संचालन India HIV/AIDS Alliance द्वारा किया जा रहा है, जिसमें AKROSS HealthTek और SHARDA Imaging सहयोगी संस्थाएं हैं।

कार्यक्रम में आधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीनों के साथ AI आधारित सॉफ्टवेयर (DeepTek – Genki Edge) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कैदियों की त्वरित और सटीक जांच संभव होगी। इससे संदिग्ध टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान कर उन्हें समय पर उपचार से जोड़ा जा सकेगा।
India HIV/AIDS Alliance के प्रोग्राम मैनेजर श्री सौभाग्य चक्रवर्ती ने बताया कि सुनियोजित क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम को पूरे उत्तराखंड में सफल बनाया जाएगा।

सेवा प्रदाता संस्थाओं के प्रतिनिधि डॉ. सुनील मल्होत्रा (निदेशक, शारदा इमेजिंग) और श्री मनोज कोहली (प्रबंध निदेशक, AKROSS HealthTeK) ने भी सुरक्षित संचालन और मरीजों के शीघ्र उपचार की प्रतिबद्धता जताई।

इस अवसर पर राज्य स्तर से श्री अनिल सिंह रावत (स्टेट प्रोग्राम मैनेजर) एवं श्री अनुराग (प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर) भी उपस्थित रहे। यह पहल जेलों में टीबी की पहचान और रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और उत्तराखंड को टीबी मुक्त राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

देवभूमि खबर

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