स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य सचिव का संकल्प—सुशासन, विकसित उत्तराखण्ड और हिमालय संरक्षण को मिलेगी प्राथमिकता

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देहरादून।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, पुलिस एवं पीएसी जवानों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को स्मरण करने तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज भारत आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब लक्ष्य ऐसा समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करना है, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा आत्मावलोकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे में राज्य ने प्रगति की है, लेकिन पलायन, रोजगार, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम, जल स्रोतों और हिमालयी पारिस्थितिकी का संरक्षण अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित उत्तराखण्ड का अर्थ केवल बड़े शहर और परियोजनाएं नहीं, बल्कि ऐसा राज्य है जहां पहाड़ का युवा अपने गांव में सम्मानजनक रोजगार पा सके, महिलाएं आत्मनिर्भर हों और हर नागरिक को बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों।

मुख्य सचिव ने सचिवालय को राज्य शासन का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से फाइल डिस्पोजल’ से आगे ‘आउटकम डिलीवरी’ की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और डाटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तेज, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों को स्वयं को केवल सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि लोक सेवक मानना चाहिए और प्रत्येक नागरिक की समस्या को संवेदनशीलता के साथ समझना चाहिए।

मुख्य सचिव ने मिलेट्स, कृषि उत्पाद, बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने। स्टार्टअप, आईटी, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार के माध्यम से रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर पहाड़ तक पहुंचाने की जरूरत है।

मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड को हिमालय का प्रहरी बताते हुए कहा कि राज्य का विकास हिमालय-संवेदनशील मॉडल पर आधारित होना चाहिए। अर्ली वार्निंग सिस्टम, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे, कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट, जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु अनुकूलन को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना जरूरी है।

उन्होंने पर्यटन को अधिक जिम्मेदार, टिकाऊ और उच्च मूल्य वाला बनाने पर भी जोर दिया। स्पिरिचुअल टूरिज्म, वेलनेस, योग, एडवेंचर, इको-टूरिज्म, होमस्टे, विंटर और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने की बात कही।

अंत में मुख्य सचिव ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को कार्यसंस्कृति का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक निर्णय उत्तराखण्ड के हित में, प्रत्येक प्रयास जनहित में और प्रत्येक कार्य विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में होना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव सहित सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी और स्कूल के बच्चे उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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