दो साल से 200 बच्चों को नहीं मिला मिड-डे मील, फर्जी रिकॉर्ड से दिखाया नियमित भोजन

दो साल से 200 बच्चों को नहीं मिला मिड-डे मील, फर्जी रिकॉर्ड से दिखाया नियमित भोजन
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक सरकारी स्कूल में कक्षा VI से VIII तक के करीब 200 विद्यार्थियों को दो वर्षों से मध्याह्न भोजन नहीं दिए जाने की मीडिया रिपोर्ट पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट में आरोप है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराए बिना ही उन्हें नियमित रूप से भोजन परोसे जाने के फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थियों ने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर शिकायत की थी। इसके बाद हुई जांच में कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ और करीब ₹14 लाख के गबन की बात सामने आई। आरोपों में रसोइयों को निर्धारित से कम भुगतान करना तथा प्रधानमंत्री पोषण अभियान के लिए उपलब्ध धनराशि के प्रधानाचार्य और अन्य अधिकारियों द्वारा कथित दुरुपयोग की बात भी शामिल है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं तो यह बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की योजना का उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बचाना और उन्हें विद्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए NHRC ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

आयोग की कार्रवाई के बाद अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि विद्यार्थियों को दो वर्षों तक भोजन क्यों नहीं मिला, फर्जी रिकॉर्ड किस स्तर पर तैयार किए गए और कथित तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।

देवभूमि खबर

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