प्रस्तावित भूमि अतिक्रमण निषेध अध्यादेश जल्द लागू करने की मांग, संयुक्त नागरिक संगठन ने राज्यपाल और सरकार को भेजा ज्ञापन

देहरादून। प्रस्तावित उत्तराखंड भूमि अतिक्रमण (निषेध) अध्यादेश-2026 को आगामी कैबिनेट बैठक में लाकर शीघ्र लागू करने की मांग को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन ने शुक्रवार 18 सितंबर को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सचिव आवास, सचिव राजस्व और मसूरी देहरा विकास प्राधिकरण को ज्ञापन भेजे। संगठन की ओर से संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के साथ ई-मेल के माध्यम से भी अपनी मांग प्रेषित की गई।
संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले सचिवालय में मुख्य सचिव से मुलाकात की। इसके बाद संबंधित विभागों के अधिकृत अधिकारियों के कक्षों और कार्यालयों में पहुंचकर प्रस्तावित अध्यादेश के संबंध में चर्चा की तथा ज्ञापन सौंपे।
ज्ञापन में कहा गया कि राज्य में सरकारी और निजी भूमि को भू-माफियाओं के अतिक्रमण एवं अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से पिछले वर्षों में किए गए अधिकांश प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके हैं। संगठन के अनुसार प्रस्तावित अध्यादेश लागू होने से अवैध कब्जों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा और वन विभाग, निगमों तथा पीड़ित भूमि स्वामियों को भी राहत मिल सकेगी।
संयुक्त नागरिक संगठन ने कहा कि प्रस्तावित कानून में नए और पुराने दोनों अवैध कब्जों के आरोपियों एवं कब्जाधारियों के विरुद्ध भारी जुर्माने के साथ 10 वर्ष तक की सजा के प्रावधान तथा विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान शामिल है। संगठन का कहना है कि ऐसे कड़े प्रावधान लागू होने से भूमि अतिक्रमण और अवैध कब्जों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार सामने आ रहे भूमि अतिक्रमण और अवैध कब्जों के मामलों से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित लोगों में कानून का भय नहीं है। संगठन ने यह भी कहा कि आम लोगों के बीच भू-माफियाओं के धनबल और राजनीतिक संबंधों के प्रभाव को लेकर चर्चा बनी हुई है।
संगठन ने आशंका जताई कि कहीं भू-माफिया अपने संसाधनों का इस्तेमाल प्रस्तावित अध्यादेश को लागू होने से रोकने के लिए तो नहीं कर रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया कि हाल ही में दो कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद अध्यादेश को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत कर पारित नहीं कराया जाना गंभीर विषय है। इससे सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
संयुक्त नागरिक संगठन ने मांग की कि आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्तावित उत्तराखंड भूमि अतिक्रमण (निषेध) अध्यादेश-2026 को प्राथमिकता के साथ प्रस्तुत कर शीघ्र पारित कराया जाए, ताकि राज्य में सरकारी और निजी भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
प्रतिनिधिमंडल में गिरीश चंद्र भट्ट, ठाकुर शेरसिंह, उमेश्वर सिंह रावत, सुशील त्यागी, प्रदीप कुकरेती, उमेश सक्सेना सहित अन्य लोग शामिल रहे।
