वाटिका ग्रुप के सीएमडी अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला गिरफ्तार, 154.36 करोड़ रुपये के अपराध से अर्जित धन का खुलासा

गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने वाटिका लिमिटेड (वाटिका ग्रुप) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत 28 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया है। दोनों को 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत, गुरुग्राम के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने वाटिका लिमिटेड, उसके प्रमोटर-निदेशकों अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला समेत अन्य के खिलाफ पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज की थी। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406 और 120-बी के तहत दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई। प्राथमिकी में धोखाधड़ी से प्रेरित कर धन प्राप्त करने, आवासीय भूखंडों की डिलीवरी नहीं करने और अन्य संबंधित अपराधों के आरोप लगाए गए थे।
ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने गुरुग्राम स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट, सेक्टर-84/85 और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2, सेक्टर-88ए परियोजनाओं में आवासीय भूखंड खरीदने के लिए करीब 260 करोड़ रुपये की पूरी बिक्री राशि अग्रिम रूप से वाटिका लिमिटेड को भुगतान की थी। इसके बाद वर्ष 2014 और 2015 में भूखंडवार समझौते किए गए।
जांच में सामने आया कि बाद में परियोजनाओं के लेआउट में बदलाव किए गए और पहले आवंटित भूखंडों के नंबर एवं स्थान बदल दिए गए। इसके बावजूद परियोजना की जमीन अलग-अलग खरीदारों को आवंटित और बेची जाती रही। वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 परियोजना में करीब 1.10 लाख वर्ग गज भूमि के लिए लगभग 90 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने के बावजूद करीब 14 वर्ष बाद भी एक भी भूखंड की डिलीवरी नहीं की गई। वहीं, वाटिका इंडिया नेक्स्ट परियोजना में भी भूखंडों की डिलीवरी आंशिक रही। ईडी के अनुसार, करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के भूखंडों का बड़ा हिस्सा अभी तक खरीदारों को नहीं दिया गया है।
जांच में अनिल भल्ला द्वारा संबंधित लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, गौतम भल्ला को समूह का प्रमुख प्रमोटर बताया गया है, जिन्होंने महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, भूमि स्वामित्व वाली कंपनियों में निदेशक पद संभाले और उनके नियंत्रण में समूह का संचालन जारी रहा। जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, दोनों ने मिलकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि परियोजना की जमीन करीब 22 समूह कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी। इन कंपनियों में कोई कर्मचारी या स्वतंत्र कारोबारी गतिविधियां नहीं थीं। इनका मुख्य उपयोग कॉरपोरेट गारंटी देने और भूमि भंडार के प्रबंधन के लिए किया जाता था। समूह की जमीन को वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखने में भी इन कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।
वाटिका लिमिटेड के बैंक खातों की जांच में यह सामने आया कि खरीदारों से प्राप्त धन का इस्तेमाल केवल उन्हीं परियोजनाओं में नहीं किया गया, जिनके लिए रकम ली गई थी। जांच के अनुसार, रकम को अन्य समूह कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी ऐसी संस्थाओं में भी स्थानांतरित किया गया, जो संबंधित परियोजनाओं का हिस्सा नहीं थीं।
ईडी ने वर्ष 2024 में हुए एक अलग लेनदेन की भी जांच की। इसके तहत स्केलर वेंचर्स ने बिक्री और पुनर्खरीद समझौते के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। बाद में 165 भूखंडों में से केवल 15 भूखंडों की पुनर्खरीद की गई। जांच के अनुसार, शेष 150 भूखंडों में से 14 भूखंड स्केलर वेंचर्स की जानकारी या सहमति के बिना करीब 13.62 करोड़ रुपये में तीसरे पक्ष को बेच दिए गए। इस मामले में अब तक अपराध से अर्जित धन की कुल राशि करीब 154.36 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इससे पहले ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत सात परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। एक आरोपी के आवासीय परिसर से मर्सिडीज-बेंज जीएलसी 300 वाहन, 1.3 किलोग्राम से अधिक वजन के सोने और हीरे के आभूषण, जिनकी कीमत करीब 1.55 करोड़ रुपये थी, तथा करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और सावधि जमा बरामद कर फ्रीज किए गए थे।
ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
