कर्नाटक पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी की कार्रवाई, दो गिरफ्तार

बेंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला बेंगलुरु के विधान सौधा थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है।
ईडी की जांच में सामने आया कि बसवराज कन्नाले ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कथित रूप से भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों के अवैध चयन की व्यवस्था की। आरोप है कि अभ्यर्थियों को सही उत्तरों सहित लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और इसके बदले उनसे अवैध रकम ली गई। जांच में यह भी सामने आया कि बसवराज कन्नाले ने तत्कालीन केपीएससी परीक्षा नियंत्रक आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से करीबी संबंधों के माध्यम से लीक हुए प्रश्नपत्र तक पहुंच हासिल की थी। गंगवार परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री की सुरक्षा और निगरानी के लिए जिम्मेदार थे।
ईडी के अनुसार, बसवराज कन्नाले ने कई अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें भर्ती परीक्षा में चयन का भरोसा दिलाया। प्रत्येक अभ्यर्थी से शुरुआत में करीब 80 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसे बातचीत के बाद 30 से 40 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी के बीच तय किया गया। तय रकम का कुछ हिस्सा नकद और बैंकिंग माध्यमों से अग्रिम रूप में लिया गया। शेष रकम की गारंटी के लिए कुछ अभ्यर्थियों से खाली हस्ताक्षरित चेक और वचन पत्र भी लिए गए थे, जिनमें से कुछ दस्तावेज तलाशी एवं जब्ती की कार्रवाई के दौरान बरामद किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि बीदर स्थित मेसर्स ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमिता के बैंक खाते का इस्तेमाल कथित अवैध रकम के कुछ हिस्से को प्राप्त करने के लिए किया गया। इसके अलावा, कुछ चयनित अभ्यर्थियों को बेंगलुरु के बाहरी क्षेत्र स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहां उन्हें सही उत्तरों वाला लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। आरोप है कि बसवराज कन्नाले और उसके सहयोगियों की निगरानी में अभ्यर्थियों को उत्तर याद करवाए गए। परीक्षा के अगले दिन अभ्यर्थियों को उनके संबंधित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की गई।
ईडी ने जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत दर्ज कारणों के आधार पर बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। वह उस समय न्यायिक हिरासत में था। इसके बाद 29 सितंबर 2026 को उसे पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत (सीसीएच-4) के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने जांच के लिए ईडी को उसकी 14 दिन की हिरासत प्रदान की।
जांच में तत्कालीन केपीएससी परीक्षा नियंत्रक आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की भूमिका भी सामने आई है। ईडी के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक के रूप में गंगवार पर भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने, प्रश्नपत्रों की छपाई को अंतिम रूप देने और गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निर्धारित परीक्षा से एक दिन पहले सही उत्तरों वाला प्रश्नपत्र बसवराज कन्नाले तक पहुंचाने में मदद की और इसके बदले अवैध लाभ प्राप्त किया।
जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर गंगवार को 18 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। वह भी उस समय न्यायिक हिरासत में थे। उन्हें 21 सितंबर 2026 को उत्पादन वारंट के आधार पर पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत (सीसीएच-4) में पेश किया गया। अदालत ने आगे की जांच के लिए गंगवार की 14 दिन की ईडी हिरासत मंजूर की।
ईडी के अनुसार, 18 से 24 अगस्त 2026 के बीच की गई तलाशी एवं जब्ती कार्रवाई में बरामद सामग्री के विश्लेषण से पता चला कि कथित आपराधिक गतिविधि से अर्जित रकम को विभिन्न माध्यमों से आगे स्थानांतरित और इस्तेमाल किया गया। इसमें बैंक खातों के माध्यम से धन हस्तांतरण, सोने के आभूषणों की खरीद, हवाई यात्रा के लिए नकद भुगतान और अन्य नकद लेनदेन शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन गतिविधियों का उद्देश्य अपराध से अर्जित रकम की प्रकृति और स्रोत को छिपाना तथा उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करना था।
ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
