डिजिटल अरेस्ट मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 7 करोड़ की ठगी के आरोपी सोहेल अख्तर गिरफ्तार

जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए एस.पी. ओसवाल से 7 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पश्चिम बंगाल में तीन ठिकानों पर 28 सितंबर 2026 को तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान ईडी ने कोलकाता से सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया।
सोहेल अख्तर को 28 सितंबर को ही कोलकाता के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जालंधर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड प्रदान की गई। इसके बाद जालंधर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को 7 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। उसकी हिरासत 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगी।
ईडी ने बताया कि यह जांच लुधियाना साइबर अपराध थाने में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। इसी समूह से जुड़े डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराध के नौ अन्य मामलों की प्राथमिकी को भी जांच में शामिल किया गया।
जांच में सामने आया कि एस.पी. ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और न्यायपालिका के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश किया और उनसे 7 करोड़ रुपये की राशि ऐंठ ली। अपराध से अर्जित धनराशि सबसे पहले रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों में जमा कराई गई।
ईडी के अनुसार, फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों का नियंत्रण गुवाहाटी की रूमी कलिता और कानपुर के अर्पित राठौर के पास था। अपराध से अर्जित धनराशि को तेजी से अलग-अलग खातों में भेजने के लिए ‘एएमएमफॉरवर्ड’ नामक एपीके एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया। अर्पित राठौर ने कंबोडिया और वियतनाम समेत अन्य देशों से जुड़े लोगों को कई म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए और इसके बदले अपने बाइनेंस खाते में आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों यानी क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 और अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
आगे की जांच में पता चला कि रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों का संचालन सोहेल अख्तर उर्फ राजू करता था। ईडी के अनुसार, वह ऐसे व्यक्तियों की भर्ती करने में प्रमुख भूमिका निभाता था, जिनके नाम पर म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए जा सकें।
जांच में यह भी सामने आया कि पहले से एपीके फाइल वाले मोबाइल फोन का इस्तेमाल रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संस्थाओं से जुड़े बैंक खातों के सिम कार्ड डालने के लिए किया जाता था। इसके बाद इन मोबाइल फोन में एपीके फाइल को सक्रिय किया जाता था, जिससे नेपाल स्थित विदेशी सहयोगी अपने उपकरणों के माध्यम से संबंधित बैंक खातों के ओटीपी और अन्य संदेश प्राप्त कर सकते थे। इस व्यवस्था के जरिए अपराध से अर्जित धन को तेजी से विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था।
ईडी के मुताबिक, सोहेल ने विदेशी लोगों को विभिन्न म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए और इसके बदले अपने बाइनेंस खाते अथवा अपने सहयोगियों के बाइनेंस खातों में क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। इसके बाद अपराध से अर्जित धन को कई म्यूल खातों में व्यवस्थित तरीके से भेजा गया, जिससे साइबर अपराध से प्राप्त रकम को छिपाने और दूसरी जगह स्थानांतरित करने में मदद मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल अन्य साइबर अपराधों और फर्जी लेनदेन के लिए किया जाता था। कई करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित धनराशि को मुखौटा कंपनियों के माध्यम से कई स्तरों पर घुमाया गया और व्यापार आधारित धनशोधन के तरीकों का इस्तेमाल कर उसे विदेश भेजा गया।
अपराध से अर्जित बची हुई रकम को 2 से 5 लाख रुपये की छोटी-छोटी रकम में विभिन्न म्यूल बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। इसके बाद इन खातों से तत्काल नकद निकासी की जाती थी। इस नकदी का इस्तेमाल आभासी डिजिटल परिसंपत्तियां खरीदने में किया गया, जिन्हें कमीशन काटने के बाद विदेशी नागरिकों के खातों में भेजा गया।
ईडी के अनुसार, म्यूल बैंक खाते आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ऋण दिलाने या रोजगार उपलब्ध कराने का झांसा देकर खुलवाए जाते थे। जांच में विदेशी सहयोगियों के साथ म्यूल बैंक खातों की जानकारी साझा करने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड निजी मोबाइल संदेश अनुप्रयोगों के इस्तेमाल का भी पता चला है।
ईडी की अब तक की जांच में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें सोहेल अख्तर उर्फ राजू को 28 सितंबर 2026, रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 और अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 14 फरवरी 2026 को 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति के संबंध में अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया गया था।
ईडी ने 19 फरवरी 2026 को रूमी कलिता, अर्पित राठौर, आनंद चौधरी, अतनु चौधरी तथा उनकी फर्म फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी। मामले में आगे की जांच जारी है
