शहीद राजेश रावत और दीपक वालिया को श्रद्धांजलि, परिजनों ने कहा- 32 साल से न्याय का इंतजार

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से शनिवार को करनपुर गोलीकांड के शहीद राजेश रावत और जोगीवाला के शहीद दीपक वालिया की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। रायपुर रोड स्थित शहीद राजेश रावत स्मारक पर राज्य आंदोलनकारियों और शहीद के परिजनों ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में शहीद राजेश रावत की माता आनंदी रावत और भाई जितेंद्र रावत ने भावुक होते हुए कहा कि 32 वर्ष बीत जाने के बाद भी परिवार को न्याय का इंतजार है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी उनके हाथ खाली हैं और शहीदों को न्याय कब मिलेगा, इसका इंतजार आज भी बना हुआ है।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, पूर्व छात्र अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी वीरेंद्र पोखरियाल तथा प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि मंच की ओर से हर वर्ष सरकार और सीबीआई से शहीदों को न्याय दिलाने की मांग उठाई जाती रही है। उन्होंने कहा कि मंच की पहल पर वरिष्ठ अधिवक्ता रमन शाह के माध्यम से मुजफ्फरनगर और नैनीताल में दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानूनी प्रयास भी किए जा रहे हैं।
रामलाल खंडूड़ी, द्वारिका बिष्ट और पूरण सिंह लिंगवाल ने मांग की कि सर्वे चौक से आगे के मार्ग का नाम शहीद राजेश रावत के नाम पर तथा बद्रीपुर मार्ग का नाम शहीद दीपक वालियां के नाम पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि सरकारों की ओर से प्रत्येक वर्ष शहीदों के नाम पर मार्गों और भवनों का नामकरण करने की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन 25 वर्ष बाद भी इन घोषणाओं को धरातल पर नहीं उतारा गया है।
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि नई पीढ़ी को राज्य निर्माण के संघर्ष और शहीदों के बलिदान से अवगत कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों को पूरा करने के लिए सभी को समन्वय के साथ उत्तराखंड के विकास में योगदान देना चाहिए। साथ ही मजबूत भू-कानून, रोजगार के अवसर, पलायन पर रोक, स्थायी राजधानी, मूल निवास तथा बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था जैसी मांगों को प्राथमिकता देने की बात कही।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीद की माता आनंदी रावत, दिनेश रावत, जितेंद्र रावत (मोनी), द्वारिका बिष्ट, जगमोहन सिंह नेगी, पूरण सिंह लिंगवाल, वीरेंद्र पोखरियाल, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, मोहन खत्री, सतेंद्र नौगाईं, मोहन थापा, महिपाल शाह, रघुवीर तोमर, संजय थापा, सरदार कुलदीप सिंह, सुमित थापा, जानकी कंडवाल, प्रमिला रावत, संगीता रावत, जानकी रावत, यशोदा रावत, पुष्पा नेगी, ज्योति रावत सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।
