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हेमकुंट साहिब के पावन कपाट शीतकाल के लिए बंद, 5000 श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गुरु ग्रंथ साहिब जी को सचखंड पहुंचाया

हेमकुंट साहिब के पावन कपाट शीतकाल के लिए बंद, 5000 श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गुरु ग्रंथ साहिब जी को सचखंड पहुंचाया
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हेमकुंट साहिब। सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब जी के पावन कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ बंद कर दिए गए। इस अवसर पर लगभग 5000 श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंतिम अरदास के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पूरे सम्मान और धार्मिक परंपराओं के साथ शोभायात्रा निकालकर उनके शीतकालीन निवास सचखंड ले जाया गया। अब श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा ग्रीष्मकाल 2027 में दोबारा शुरू होगी।

कपाट बंद करने के समारोह का शुभारंभ सुखमनी साहिब के पाठ से हुआ। इसके बाद श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी सिंह गुरदियाल सिंह और उनके जत्थे ने शबद कीर्तन प्रस्तुत किया। पूरा वातावरण गुरबाणी और धार्मिक जयकारों से भक्तिमय हो गया। अंतिम अरदास के पश्चात “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारों के बीच श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सम्मानपूर्वक सचखंड पहुंचाया गया।

 

शोभायात्रा का नेतृत्व गढ़वाल स्काउट्स बैंड और 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर के जवानों ने किया। सेना के जवानों ने समारोह के दौरान भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने इस वर्ष की यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, भारतीय सेना, राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता और समर्पण से पूरी यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्थाएं सुचारु बनी रहीं।

उन्होंने यात्रा के सफल संचालन में योगदान देने वाले विभिन्न गुरुद्वारों के सेवादारों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सेवादारों की निष्ठा और परिश्रम से इतनी बड़ी तीर्थयात्रा को व्यवस्थित ढंग से संपन्न करने में मदद मिली। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब रतूड़ा गुरुद्वारा भी संगत के लिए खुल गया है।
ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने सभी गुरुद्वारों में संगत की ओर से मिले सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के अनुशासन और सहयोग के कारण यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं का संचालन सुगमता से हो सका।

इस वर्ष श्री हेमकुंट साहिब में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई सहित विभिन्न देशों के तीर्थयात्री शामिल रहे। समारोह का विशेष आकर्षण पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों का जत्था रहा, जिसने पवित्र स्थल के दर्शन कर कपाट बंद होने के धार्मिक समारोह में भाग लिया।

ट्रस्ट के अनुसार, एक दिन पहले से हल्की बर्फबारी शुरू होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। प्रतिकूल मौसम के बीच भी लगभग 5000 श्रद्धालु हेमकुंट साहिब पहुंचे और अंतिम अरदास में शामिल होकर गुरु चरणों में शीश नवाया। अब श्रद्धालुओं को वर्ष 2027 की ग्रीष्मकालीन यात्रा का इंतजार रहेगा।

देवभूमि खबर

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