चमोली में एक हफ्ते में 12 मौतें सुधलेवा कौन
देहरादून। भारी बारिश के बाद जनपद चमोली में मौत का ताण्डव चल रहा है। पिछले एक हफ्ते में ही आपदा के चलते 12 लोगों की मौत हो गयी है जबकि दो अब भी लापता हैं। इस बार की आपदा इतनी भयानक है कि पिछले साल पूरे मॉनसून सीजन में जितने लोगों की मौत हुई थे इस साल उससे ज्यादा लोग अभी तक काल के गाल में समा गए हैं। संकट का यह दौर जारी रह सकता है क्योंकि भारी बारिश अभी बाकी है। लेकिन, इस भीषण संकट के समय चमोली अनाथ है क्योंकि उसके आंसू पोंछने वाले कोई प्रभारी मंत्री नहीं है। कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत पंत चमोली के प्रभारी मंत्री थे. उनके निधन के बाद चमोली अनाथ हो गया है। पंत के विभाग तो मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत देख रहे हैं लेकिन उनके प्रभार वाले जिलों में अभी तक किसी को प्रभारी मंत्री नहीं बनाया गया है। यही वजह है कि इतनी मौतों के बाद भी सरकार में कोई बड़ा जिम्मेवार चमोली नहीं गया है।
बताया जा रहा है कि स्वर्गीय प्रकाश पंत की मृत्यु के बाद चमोली का प्रभार धन सिंह रावत को सौपा गया था। जब इस बाबत उनसे पूछा गया तो उन्हांेने यह बात सिरे से खारिज कर दी कि उन्हें चमोली, रुद्रप्रयाग का प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि उनके पास सिर्फ टिहरी और उत्तरकाशी का प्रभार है। चमोली और रुद्रप्रयाग के बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है।
हालांकि धन सिंह ने यह जरूर बताया कि उन्हें जून के महीने में जिला योजना की बैठक लेने के लिए चमोली भेजा गया था और उन्होंने बैठक ली भी थी. लेकिन इन जिलों के प्रभारी मंत्री बनाए जाने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
सवाल ये है कि क्या धन सिंह रावत को चमोली और रुद्रप्रयाग का प्रभारी मंत्री बनाने का कोई आदेश शासन से हुआ है। जवाब है शायद नहीं क्योंकि यदि ऐसा हुआ होता तो मंत्री इससे इनकार नहीं कर सकते थे। दूसरा प्रकाश पंत के विभागों को सीएम त्रिवेन्द्र देखेंगे इस बाबत जब आदेश जारी हुए तो उनके निधन से खाली हुए जिले के प्रभारी मंत्री बनाए जाने के आदेश क्यों नहीं जारी किए गए। गौरतलब है कि चमोली को इस समय मदद और सांत्वना की बहुत जरूरत है. जिले में 6 अगस्त से शुरु हुआ मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 6 अगस्त को पहाड़ी से मलबा एक बस पर गिरा जिसमें 6 की जान चली गई. 9 अगस्त को थराली के फल्दिया में मां-बेटी मलबे में दब गए जिनको अभी तक निकाला नहीं जा सका है। 12 अगस्त को भी बादल फटने से घाट इलाके में 6 लोगों की मौत हो चुकी है. इतनी तबाही के बाद भी यदि सरकार का कोई नुमांइदा इनके घावों पर मरहम लगाने न पहुंचे तो इसे संवेदनहीनता की इंतहा ही कहा जा सकता है।

