गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए सही पोषण बेहद अहम हैं :खुराना
पौड़ी।महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के तत्वाधान में ‘‘सही देश-सही पोषण‘‘ के तहत आयोजित राष्ट्रीय पोषण माह की एक दिवसीय कार्यशाला विकास भवन सभागार, पौड़ी में मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु खुराना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को दिए जाने वाले जरूरी पोषक तत्वों की जानकारियां दी।
इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों पर संचालित कार्यक्रम ‘‘सही देश-सही पोषण‘‘ के तहत सभी रेखीय विभागों और लोगों से पोषण को लेकर जन-जागरूकता अभियान चलाने को कहा। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं को जनहित में बताया। कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए सही पोषण बेहद अहम हैं। यही नहीं स्वस्थ देश के लिए स्वस्थ बच्चों का होना भी जरूरी हैं। इसके लिए गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को विटामिन, प्रोटीन, कार्बाेहाइड्रेट, वसा, और खनिज तत्वों आदि का दैनिक भोजन में शामिल होना आवश्यक है, जिससे कि जच्चा और बच्चा दोनों को सही तन्दुरस्ती प्राप्त हो सके।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिमालयन इंस्टिट्यूट आॅफ मेडिकल सांइसिस की एमडी डा. नेहा शर्मा ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को पोषण की भ्रांतियों से जुड़े विभिन्न अपवादों पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि पहले के समय में घर परिवारों में अक्सर गर्भवती और उसके नवजात को ‘‘ये देना और वो नहीं देना‘‘ की तर्ज पर पोषक तत्वों से परहेज कराया जाता था, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। उन्होंने गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण में अधिक से अधिक पोषक तत्वों को भोजन में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही दो घंटे के भीतर नवजात को उसकी मां का स्तनपान कराए जाने पर भी जोर दिया। कहा कि मां का दूध बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए बेहद अहम है। इसके अलावा महिलाओं को गर्भधारण करने के दो-तीन माह पहले से ही फाॅलिक एसिड की गोलियां लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वस्थ तन और मन वाले बच्चे के लिए अभिभावकों को गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म और फिर दो साल तक के एक हजार दिनों के चक्र को सबसे महत्वपूर्ण बताया। कहा कि इन्हीं एक हजार दिनों में बच्चे के मस्तिष्क का सर्वाधिक विकास होता है। उन्होंने कहा कि अकेले उत्तराखंड में करीब 56 प्रतिशत बच्चों को अपनी माँ का दूध प्राप्त होता ही नहीं। जबकि वैज्ञानिक प्रमाणिकता के आधार पर बच्चे को करीब दो साल तक माँ का दूध सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है।
इस मौके पर सिविल जज व जिला विकास प्राधिकरण के सचिव संदीप तिवारी ने पोषण को लेकर किये जा रहे जनजागरूकता अभियान को सराहनीय बताया। उन्होंने प्राधिकरण की ओर से संचालित विधिक शिविरों में भी इस प्रकार के कार्यक्रम चलाए जाने को कहा।
इस मौके पर जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, सहायक परियोजना निदेशक सुनील कुमार, स्वजल प्रबंधक व परियोजना अर्थशास्त्री दीपक रावत, सीवीओ एसके सिंह, सीईओ मदन सिंह रावत, डीपीआरओ एमएम खान, सीडीपीओ बाल विकास मीना शाह, सीडीपीओ नेहा सिंह, आस्था सेवा संस्था के सचिव राकेश चन्द्रा, डा. दीपक कुंवर, डा. नाजिम अली आदि उपस्थित रहे।

