ऋषिकुल मैदान में बनेगा भव्य ‘मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान’, भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा नया केंद्र

हरिद्वार। मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाओं में शामिल ‘मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान’ की स्थापना अब जल्द ही धरातल पर उतरने जा रही है। हरिद्वार स्थित ऋषिकुल मैदान में प्रस्तावित इस भव्य संस्थान के निर्माण को लेकर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आर.के. सुधांशु ने गुरुवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति और आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
स्थलीय निरीक्षण के बाद हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में परियोजना की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में भूमि संबंधी विषयों, मूर्ति स्थापना, चारदीवारी निर्माण, आधारभूत सुविधाओं, मंच निर्माण, पार्किंग व्यवस्था तथा अन्य निर्माण कार्यों की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजना को शीघ्र गति देने के निर्देश दिए तथा एक सप्ताह के भीतर विभागवार कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा।
उन्होंने बताया कि शासन स्तर पर परियोजना के क्रियान्वयन के लिए सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल को नोडल अधिकारी तथा जिला स्तर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने कहा कि प्रस्तावित शोध संस्थान भारतीय संस्कृति, प्राचीन ज्ञान-विज्ञान और प्राच्य विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। संस्थान में योग, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, भारतीय कला, दर्शन, वैदिक अध्ययन तथा अन्य प्राच्य विषयों पर शोध, अध्ययन और प्रशिक्षण की आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
बैठक में शोध संस्थान की प्रस्तावित कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इस अवसर पर सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, सचिव आयुष रंजना राजगुरु, महानिदेशक संस्कृति एवं भाषा युगल किशोर पंत, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- यह संस्थान उत्तराखंड को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और शोध के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

