गोवंश संरक्षण की दिशा में योगी सरकार क विस्तृत प्लान तैयार

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उत्तर प्रदेश में छुट्टा जानवरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए और गोवंश संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव के लिए योगी सरकार ने एक विस्तृत प्लान तैयार किया है.
इसके अनुसार प्रदेश के गांव-गांव में गौशाला खोलने की तैयारी है. प्रदेश के तमाम गांव के प्रधानों से इसके लिए जरूरी जमीन ढूंढ़ने को भी कहा गया है.
रायबरेली के कुंवरमऊ गांव के प्रधान अवधेश यादव कहते हैं कि हाल ही में बीडीओ के माध्यम से उनसे संपर्क किया गया था. इसमें पूछा गया था कि गांव में कहीं भी 5 बीघा जमीन खाली है तो सूचित करें.
उन्होंने कहा कि उसके बाद से अभी तक तो किसी ने संपर्क नहीं किया. हालांकि ये पता चला था कि ये जमीन की जानकारी गौशाला बनाने के उद्देश्य से मांगी गई है.
दरअसल योगी सरकार ने प्रदेश में गौवंश का सरंक्षण करने के लिए 25 जिलों में प्रोजैक्ट शुरू किया है. इसके तहत करीब 75 हजार से 1 लाख तक गौवंश का संरक्षण किया जाएगा.
सरकार की योजना है कि हर पंचायत में एक गौशाला खोली जाए. इसके लिए स्थानीय स्तर पर कमेटियों को गठित कर उन्हें ही गायों की जिम्मेदारी भी दी जाएगी.
प्रदेश सरकार की इस रणनीति का खुलासा रविवार को लखनऊ में विश्व हिन्दू परिषद के गौरक्षा अधिवेशन में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया.
उन्होंने कहा कि गौ-संरक्षण और गौ-संवर्धन दोनों का काम हमें करना है. गौ नस्ल सुधार पर हमें शोध करना चाहिए था. भारतीय गौ की नस्ल धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है. गौचर भूमि पर अनेक प्रकार से कब्जे हैं, उन्हे हटाना चाहिए.
सीएम योगी ने कहा कि गाय को घर में बांधेंगे तो हमें और भी लाभ मिलेंगे. गाय माता दूध दे या न दे, पर गोबर और गौ-मूत्र तो देती है. हर चीज को हम सरकार के भरोसे छोड़ देते हैं. सीएम ने कहा कि सरकारी भूमि से सभी तरह के कब्जे हटाए जा रहे हैं. गौचर भूमि को संवर्धित और संरक्षित करेंगे.
सीएम ने कहा कि गाय के चारे और गौशाला की व्यवस्था स्थानीय कमेटियां लेंगीं. गौशाला बनाने में सरकार बुनियादी सुविधाएं देगी, पर जिम्मेदारी लेनी होगी. उन्होंने बताया कि पहले चरण में हमने 23 से 25 जनपद लिए हैं. इसमें 75 हजार से लेकर 1 लाख तक गौ वंश का संरक्षण हम करेंगे. स्थानीय स्तर पर कमेटियां बनेगी और लोगों की सहभागिता होगी.
सीएम योगी ने कहा कि गौशाला को लेकर सर्वे करीब करीब पूरा हो चुका है. जल्द ही इन्हें खोलना शुरू कर दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि ये गौशालाएं बुन्देलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होंगीं. जहां लोग दूध न मिलने पर मवेशियों को छोड़ देते हैं या पानी की समस्या के कारण ऐसा करते हैं.

देवभूमि खबर

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