दून विश्वविद्यालय की अकादमिक यात्रा उत्साह जनक: प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल
देहरादून।दून यूनिवर्सिटी ने 21-22 नवंबर, 2025 तक “सस्टेनेबल एनवायर्नमेंट के लिए नई टेक्नीक” पर दो दिन की वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ की। यह इवेंट स्कूल ऑफ़ एनवायर्नमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज़ (SENR) ने किया था और डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की SSR पहल के तहत अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (ANRF) ने इसे स्पॉन्सर किया था। स्कूल ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्स के एसोसिएट प्रोफ़ेसर एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. अचलेश दावरे ने अतिथियों का स्वागत किया।
उद्घाटन सत्र को विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. सुरेखा डंगवाल और मुख्य अतिथि डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट, डायरेक्टर, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने संबोधित किया । कुलपति प्रो. डंगवाल ने यूनिवर्सिटी की शुरुआत से लेकर अब तक एकेडमिक योगदान, पब्लिकेशन और सरकारी फ़ंड वाले प्रोजेक्ट में हुई बढ़ोतरी पर रोशनी डाली। उन्होंने मज़बूत एकेडेमिया-इंडस्ट्री पार्टनरशिप और रिसर्च के नतीजों को समाज तक असरदार तरीके से पहुँचाने के महत्व पर भी ज़ोर दिया। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की अब तक की क्षेत्र की यात्रा काफी उपलब्धियां से परिपूर्ण एवं उत्साह जनक रही है और हमारी कोशिश है कि हम इसे जारी रखें l
मुख्य अतिथि डॉक्टर बिष्ट ने बढ़ती एनवायर्नमेंटल चुनौतियों से निपटने के लिए नई साइंटिफिक टेक्नीक की तुरंत ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने क्लाइमेट चेंज के खतरनाक असर पर ज़ोर दिया और समाज और इकोलॉजिकल भलाई के लिए रिसर्च पर आधारित सस्टेनेबल सॉल्यूशन की अपील की।
स्कूल ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्स के डीन, डॉ. सुरिंद्र सिंह सुथार ने रिसर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल एकेडमिक योगदान में स्कूल की उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने सस्टेनेबल एनवायरनमेंटल प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए कंज़र्वेशन, नेचुरल रिसोर्स को ठीक करने और मिलकर साइंटिफिक कोशिशों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। वर्कशॉप कोऑर्डिनेटर डॉ. अचलेश दावरे ने प्रोग्राम का ओवरव्यू दिया, जिसमें नए साइंटिफिक तरीकों को अपनाने, रिसर्च कैपेसिटी बढ़ाने और ज़्यादा प्रोडक्टिव एनवायरनमेंटल रिसर्च के लिए एडवांस्ड टेक्नीक की समझ और इस्तेमाल को मज़बूत करने की अहमियत पर ज़ोर दिया।
शुरुआती लेक्चर देते हुए, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग (IIRS), देहरादून में फॉरेस्ट्री और इकोलॉजी के हेड, डॉ. हितेंद्र पडालिया ने हिमालय के इकोसिस्टम की कमज़ोरी और एनवायरनमेंटल बदलाव और इनवेसिव स्पीशीज़ से पैदा होने वाले खतरों पर चर्चा की। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में एनवायरनमेंटल, बायोडायवर्सिटी और बायोकेमिकल डायनामिक्स का आकलन करने में एडवांस्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की भूमिका दिखाई। वर्कशॉप में यूनिवर्सिटी के अलग-अलग डिपार्टमेंट के साथ-साथ पोस्टग्रेजुएट डिग्री कॉलेजों के फैकल्टी मेंबर और स्टूडेंट्स शामिल हुए।
इवेंट का स्कूल ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उज्ज्वल कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने वर्कशॉप के सफल आयोजन में पार्टिसिपेंट्स और ऑर्गनाइज़िंग कमिटी के शानदार योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
