नीट-यूजी फर्जी दस्तावेज मामले में एक और गिरफ्तारी, एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के नाम पर 5.58 लाख रुपये बरामद

देहरादून। नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) निवासी खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, भोपाल, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये नकद बरामद किए हैं।
मामले में 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। आरोप है कि विभिन्न अभ्यर्थियों ने सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे। जांच के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज कूटरचित पाए गए। थाना रायपुर में मुकदमा संख्या 380/26 और थाना क्लेमेंटाउन में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। रायपुर थाने में दर्ज मुकदमे में विवेचना के दौरान धारा 3(5) बीएनएस भी बढ़ाई गई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने निष्पक्ष जांच और गहन परीक्षण के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 श्रीमती जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। एसआईटी ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर दस्तावेज कब्जे में लिए गए, जिनके परीक्षण से अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।
पुलिस के अनुसार, इससे पहले 21 सितंबर को मामले में रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया था। रूपेश पंडित की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के एवज में लिए गए 8 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने धीरज कुमार श्रीवास्तव को उसकी टाटा नेक्सॉन कार संख्या एमपी-04-वाई-0655 सहित गिरफ्तार किया। वाहन की तलाशी के दौरान 5 लाख 58 हजार 100 रुपये बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के एवज में कमीशन के रूप में दी थी।
पूछताछ में पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि धीरज श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘एमबीबीएस वे’ नाम से कार्यालय संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम सहित अन्य पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर प्रवेश दिलाने का काम करता था। धीरज की मुलाकात करीब दो वर्ष पूर्व रूपेश पंडित से उत्तरकाशी स्थित एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी और इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।
पुलिस के मुताबिक, अरविंद कुमार ने अपनी पुत्री और दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की। धीरज ने अपने एक अन्य साथी से कम अंक वाले अभ्यर्थियों के एमबीबीएस में प्रवेश के संबंध में जानकारी ली। पुलिस के अनुसार, इसके बाद उत्तराखण्ड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से प्रवेश की बात सामने आई और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से तीन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लिया।
एसआईटी द्वारा मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तार आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव पुत्र दिवाकर कुमार श्रीवास्तव, उम्र 37 वर्ष, हाउस नंबर 61, खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, जिला भोपाल, मध्य प्रदेश का निवासी है।
बरामदगी में धीरज श्रीवास्तव से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये तथा रूपेश पंडित की निशानदेही पर 8 लाख रुपये नकद शामिल हैं।
पुलिस टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक भरत सिंह रावत, अपर उपनिरीक्षक सुशील बलोनी, हेड कांस्टेबल सोबन सिंह राणा और कांस्टेबल किशन पाल शामिल रहे।
