सीएम धामी ने नगर निकाय जनप्रतिनिधियों से किया संवाद
देहरादून।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शहर से संवाद’ कार्यक्रम में राज्य के नगर निगमों और नगर पालिकाओं के महापौर एवं अध्यक्षों के साथ सीधा संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने शहरी विकास विभाग द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों की सहायता हेतु तैयार किए गए तीन वेब पोर्टल का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निकाय केवल प्रशासकीय इकाई नहीं बल्कि सेवा केंद्र बनें, जहां नागरिक विश्वासपूर्वक अपनी समस्याएं लेकर आएं।
मुख्यमंत्री ने इस संवाद कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनमें नगर निकाय कार्यालयों का डिजिटलीकरण, नगरों में रजत जयंती पार्क और वेंडिंग जोन का निर्माण, टाइड फंड को अनटाइड करने के लिए भारत सरकार से अनुरोध, और महिलाओं व पुरुषों के लिए हाई-टेक हेयर सैलून/पार्लर के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत शामिल है। इसके तहत प्रत्येक नगर निगम में 10, नगर पालिका में 5 और नगर पंचायत में 3 हाई-टेक सैलून स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को नसीहत देते हुए कहा कि वे अपनी भूमिका को केवल एक पद न मानें, बल्कि इसे जनसेवा के एक मिशन के रूप में अपनाएं। “हमारी जिम्मेदारी केवल सत्ता में बने रहने की नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने की है।” उन्होंने कहा कि “ट्रिपल इंजन” सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर बल देते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की सबसे बड़ी गारंटी है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नगर निकायों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि नगर निगम और नगर पालिकाएं किसी भी शहर की आत्मा होती हैं। ये केवल बुनियादी सुविधाएं देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये किसी शहर की दिशा और दशा तय करती हैं। उन्होंने कहा कि शहरी निकायों को जल निकासी, कचरा प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने सभी नगर निकायों से आग्रह किया कि वे सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों से निपटने हेतु सामूहिक प्रयास करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना, स्मार्ट सिटी मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कार्यक्रमों ने शहरी भारत का स्वरूप बदला है और उत्तराखंड में भी राज्य सरकार इन्हें प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि “विकास भी, विरासत भी” के मूलमंत्र पर कार्य करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का कार्य भी साथ-साथ चल रहा है। मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य को अग्रणी बनाने में माताओं और बहनों की सबसे बड़ी भूमिका है और उनके उत्पाद बड़े ब्रांडों से भी बेहतर हैं।
उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि नीति आयोग की एसडीजी रिपोर्ट में उत्तराखंड सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में देश में प्रथम स्थान पर है। एक वर्ष में बेरोजगारी दर में 4.4% की गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त भू-कानून, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से शासन प्रणाली को पारदर्शी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते तीन वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भेजा गया है।
कार्यक्रम में देहरादून के मेयर श्री सौरभ थपलियाल सहित राज्य के सभी नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगर आयुक्त श्रीमती नमामि बंसल, सचिव श्री नितेश कुमार झा, शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और 100 से अधिक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
