उत्तराखंड में बिजली टैरिफ यथावत, प्रस्तावित 17% वृद्धि को आयोग ने किया खारिज

देहरादून,। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में किसी प्रकार की वृद्धि को मंजूरी नहीं दी है। जबकि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने प्रारंभ में 16.23 प्रतिशत और बाद में संशोधित कर 17.40 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि का प्रस्ताव रखा था।
आयोग ने विस्तृत समीक्षा के बाद पाया कि प्रस्तावित वृद्धि के बावजूद मौजूदा टैरिफ संरचना में ही राजस्व संतुलन संभव है। आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) 12,489.54 करोड़ रुपये निर्धारित की है, जबकि मौजूदा दरों पर अनुमानित राजस्व 12,590.41 करोड़ रुपये आंका गया है। इससे 100.87 करोड़ रुपये का अधिशेष सामने आया है।
यूपीसीएल ने 14,731.98 करोड़ रुपये की ARR और 2,183.94 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर को दर्शाते हुए वृद्धि का प्रस्ताव दिया था। हालांकि आयोग ने आंकड़ों के परीक्षण के बाद इस दावे को उचित नहीं माना और टैरिफ में वृद्धि की आवश्यकता से इनकार किया।
हालांकि समग्र दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन आयोग ने कुछ श्रेणियों में टैरिफ युक्तिकरण के तहत बदलाव किए हैं। सिंगल पॉइंट बल्क सप्लाई के तहत दर को 7.50 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 6.25 रुपये प्रति यूनिट किया गया है।
औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए लोड फैक्टर स्लैब को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। 50 प्रतिशत से अधिक लोड फैक्टर पर दर घटाकर 6.60 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है, जबकि इससे कम पर उच्च दर लागू होगी।
आयोग ने डिजिटल भुगतान पर 1.5 प्रतिशत और अन्य माध्यमों से भुगतान पर 1 प्रतिशत शीघ्र भुगतान छूट को जारी रखा है। प्रीपेड मीटर अपनाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में 4 प्रतिशत और अन्य उपभोक्ताओं को 3 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
इसके अलावा, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन टैरिफ 0.39 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है। सौर वॉटर हीटर पर छूट भी यथावत रखी गई है।
आयोग ने यूपीसीएल को स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने और उपभोक्ताओं को इसके उपयोग के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उच्च हानि वाले फीडरों की पहचान कर उनके सुधार के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया है।
आयोग ने यूपीसीएल के निदेशक मंडल को सभी निर्देशों के अनुपालन की नियमित निगरानी करने और त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कुल मिलाकर, आयोग के इस निर्णय से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, जबकि बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार और दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

