दून पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का किया भंडाफोड़,गिरोह के तार पाकिस्तान, दुबई और देश के कई राज्यों से जुड़े

दून पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का किया भंडाफोड़,गिरोह के तार पाकिस्तान, दुबई और देश के कई राज्यों से जुड़े
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देहरादून।आभासी दुनिया के ज़रिये बहलाकर धर्मांतरण कराने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दून पुलिस ने “ऑपरेशन कालनेमि” के अंतर्गत दो अलग-अलग प्रकरणों में उत्तराखण्ड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की है। गिरोह के तार पाकिस्तान, दुबई और देश के कई राज्यों से जुड़े पाए गए हैं।

रानीपोखरी निवासी व्यक्ति की शिकायत पर उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करने के मामले में पुलिस ने 58/2025 और प्रेमनगर की पीड़िता की सूचना पर 126/25 केस दर्ज किया है।

जांच में सामने आया कि पीड़ित युवतियों को मुस्लिम युवकों और पूर्व हिंदू धर्म से धर्मांतरित महिलाओं द्वारा ब्रेनवॉश किया जा रहा था। उन्हें दिल्ली बुलाकर आधार पते में बदलाव, सेफ हाउस में रखकर धर्मांतरण और निकाह कराए जाने की साजिश रची जा रही थी।

गिरोह द्वारा सोशल मीडिया और लूडो स्टार जैसे ऑनलाइन गेम के माध्यम से पीड़िताओं से दोस्ती कर उन्हें इस्लाम की शिक्षा दी जाती थी। पाकिस्तानी मौलवियों द्वारा ज़ूम एप से कुरान पढ़ाई जाती थी और ‘रिवर्टेड मुस्लिम’ कहकर उनका उत्साहवर्धन किया जाता था।

प्रेमनगर थाने में दर्ज मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे मुस्लिम युवकों और पूर्व हिंदू धर्म से धर्मांतरित महिलाओं द्वारा बहला-फुसलाकर दिल्ली बुलाया गया और वहां उसे सेफ हाउस में रखकर धर्म परिवर्तन के बाद निकाह की साजिश रची गई। वहीं रानीपोखरी में दर्ज मामले में एक पिता ने शिकायत की कि उसकी पुत्री को बहकाकर उसका धर्म परिवर्तन करने और निकाह कराने की कोशिश की जा रही है। अब तक की जांच में सामने आया है कि यह दोनों प्रकरण एक ही गिरोह से जुड़े हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह में शामिल आरोपियों में अब्दुल रहमान उर्फ महेन्द्र पाल सिंह (दिल्ली), अबु तालिब (मुजफ्फरनगर), अब्दुर रहमान उर्फ रूपेन्द्र सिंह (देहरादून), आयशा उर्फ कृष्णा (गोवा), सुलेमान (दुबई निवासी, देहरादून मूल) और अयान (दिल्ली) प्रमुख हैं। इनमें से कुछ को आगरा पुलिस पूर्व में गिरफ्तार कर चुकी है और अब देहरादून पुलिस ने उनके विरुद्ध वारंट जारी किए हैं।

इनमें से कई को आगरा पुलिस पूर्व में गिरफ्तार कर चुकी है, जिनके विरुद्ध देहरादून से वॉरंट जारी किए गए हैं।

जांच में खुलासा हुआ कि पीड़िताओं को फोन और सिम कार्ड देकर ओटीपी, व्हाट्सऐप बिज़नेस डाउनलोड कराने के बाद मोबाइल को नष्ट करने और संपर्क सीमित रखने के निर्देश दिए जाते थे, जिसे गिरोह ‘रेस्क्यू’ कहता था।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि गिरोह में पहले से धर्मांतरित पुरुषों व महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता था, जो पीड़िताओं को विश्वास में लेकर उन्हें “धार्मिकता” और “नई पहचान” की आड़ में प्रभावित करते थे।

अब तक की विवेचना में दोनों प्रकरण एक ही गिरोह से जुड़े पाए गए हैं। पुलिस द्वारा आरोपी अयान और सुलेमान की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन कर कार्रवाई जारी है।

देवभूमि खबर

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