अहंकार से मनुष्य के व्यक्तित्व में विकार उत्पन्न होता है: आचार्य गंगाधर जोशी
देहरादून।केदारपुरम के चंद्र बदनी एंक्लेव में आयोजित श्रीमती कमला पुरोहित द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा अमृत ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं को भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए भगवान व्यास गद्दी पर विराजमान आचार्य पंडित गंगाधर जोशी ने श्री हरि के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हुए कहा इस सृष्टि की रचना इस प्रकार की गई है कि यहां सभी प्रकार के जीवों के जीवन का वास हो सके और इसलिए चराचर जगत में सभी के अनुकूल जीवन पोषण का वातावरण बने और इसके लिए हम मनुष्यों की जिम्मेदारी सभी जीवों से अधिक है क्योंकि हमको ईश्वर ने बौधिक चेतना युक्त किया है l इस जीवन में कैसे हम जन कल्याण के लिए समर्पित हो सकें उसके लिए हमें सदविचार और सद्गुणों को विकसित करना चाहिए।
आचार्य जोशी ने कहा कि काम -क्रोध मद-लोभ से मनुष्य को दूर रहना चाहिए क्योंकि मन, बुद्धि और चित्त से मनुष्य का निर्माण होता है परंतु मद और लोभ के कारण उसमें अहंकार आ जाता है जिससे उसके व्यक्तित्व में विकार उत्पन्न हो जाता है ।
आचार्य गंगाधर जोशी ने भगवान के अनेक रूपों में अवतरित उनकी विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि हर जीव में ईश्वर का अंश है और वह साक्षात ईश्वर का रूप होता है इसलिए हमें सभी जीवों का सम्मान करना चाहिए।
आचार्य जोशी ने कहा कि मनुष्य को कभी भी क्रोध नहीं करना चाहिए क्योंकि क्रोध से कलह उत्पन्न होता है जो घर मंदिर के लिए उचित नहीं है ।उन्होंने कहा कि हमें सदैव यह प्रयत्न करना चाहिए कि हमारे कर्मों से किसी को किसी प्रकार का कष्ट या पीड़ा न पहुंचे तथा किसी की भावनाएं हमारी वाणी से आहत न हो, यदि हर मनुष्य इस तरह से समाज में व्यवहार करें तो कभी भी कहीं भी कटुता और वैमनश्यता नहीं रहेगी और समरस समाज का निर्माण होगाl
साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में मुख्य रूप से पंडित अनुसूया प्रसाद पुरोहित, पंडित उमेश चंद्र पुरोहित, पंडित राकेश चंद्र पुरोहित, पंडित नितेश जोशी, दिनेश चंद्र जोशी, गिरधारी पांडे, भूपेंद्र हटवाल, घनश्याम थपलियाल आदि ने भूमिका निभाई ।
इस अवसर पर श्री देवी प्रसाद पुरोहित, श्री प्रेमचंद्र पुरोहित, श्रीमती रुक्मणी पुरोहित, श्रीमती अंजू पुरोहित, श्रीमती लवली पुरोहित श्री सूर्य प्रकाश पुरोहित, लोकेश पुरोहित, आकांक्षा पुरोहित, अक्षत पुरोहित सहित सभी परिजन उपस्थित रहे।

