आज़ादी के 77 साल बाद भी गुलामी जैसी ज़िंदगी: केसरवाला गांव की ज़मीन पर सेना का विवादित कब्ज़ा

आज़ादी के 77 साल बाद भी गुलामी जैसी ज़िंदगी: केसरवाला गांव की ज़मीन पर सेना का विवादित कब्ज़ा
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देहरादून (रायपुर)।रायपुर ब्लॉक के ऐतिहासिक केसरवाला गांव में सेना द्वारा कथित तौर पर नॉन-जेड ए भूमि पर कब्ज़ा कर ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने रविवार को गांव का दौरा कर ग्रामीणों की समस्या सुनी और सड़क मार्ग का निरीक्षण किया।

नेगी ने बताया कि जिस सड़क को सेना अपने स्वामित्व की बता रही है, राजस्व दस्तावेजों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1904 में सेना द्वारा 972.22 एकड़ और 1940 में 244.139 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी, लेकिन शेष भूमि आज भी किसानों के नाम दर्ज है। खसरा संख्या 318, 340, 341 के बारे में रक्षा संपदा विभाग भी 7 जून 2012 को लिखित रूप में यह स्पष्ट कर चुका है कि इन पर सेना के पास कोई दस्तावेज नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सेना बिना अधिग्रहण दस्तावेजों के गांव की भूमि पर नाजायज कब्ज़ा कर ग्रामीणों को सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर रही है। ग्रामीणों को तालाब जैसी कच्ची सड़कों से गुजरना पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

इस गंभीर मुद्दे पर 24 मई 2024 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। नेगी ने आश्वासन दिया कि यह मामला मुख्यमंत्री दरबार और उच्च न्यायालय तक पहुंचाया जाएगा और जब तक समाधान नहीं होगा, मोर्चा चैन से नहीं बैठेगा।

निरीक्षण के दौरान सूरत सिंह नेगी, प्रवीण शर्मा ‘पिन्नी’, कलम सिंह रावत, प्रेम दत्त चमोली, राजेश मनवाल, रघुवीर सिंह राणा, भानु नेगी, केदार सिंह नेगी, स्वरूप सिंह पंवार, भगत सिंह नेगी, मंगला पंवार, सोबती चमोली, सावित्री नेगी, मंजू नेगी, रजनी चमोली, कुसुम चमोली, प्रभा मनवाल, महेंद्र सिंह कंडारी, सूरज रमोला, तोताराम चमोली, प्यारेलाल चमोली, विपिन चमोला आदि लोग मौजूद रहे ।

देवभूमि खबर

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