चारधाम यात्रा में सेवा देंगे 4300 से अधिक घोड़ा-खच्चर संचालक

चारधाम यात्रा में सेवा देंगे 4300 से अधिक घोड़ा-खच्चर संचालक
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देहरादून। मां गंगा और मां यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही बुधवार से पवित्र चारधाम यात्रा की शुरुआत हो रही है। उत्तराखंड की आर्थिकी में यह यात्रा बेहद अहम है, जिससे होटल-लॉज, परिवहन, टूरिज्म और पशुपालन क्षेत्र के हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी है। खासतौर पर केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे दुर्गम धामों की यात्रा के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में घोड़े-खच्चरों की सेवाएं लेते हैं। इस वर्ष इन दोनों धामों के लिए 8000 से अधिक घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण किया गया है।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अब तक 2493 संचालकों ने पांच हजार से अधिक घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण कराया है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक लगभग 18 किमी लंबे पैदल मार्ग पर पशुपालन विभाग ने सोनप्रयाग, गौरीकुंड, लिंचौली और केदारनाथ में पशु चिकित्सालय स्थापित किए हैं। साथ ही 5 डॉक्टर और 7 पैरावेट कर्मचारियों की तैनाती के साथ 13 जगहों पर गरम पानी की व्यवस्था भी की गई है, जिससे जानवरों को विश्राम और राहत मिल सके।

यमुनोत्री यात्रा के लिए 3700 से अधिक घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण किया गया है। जानकीचट्टी में अस्थाई पशु चिकित्सालय की स्थापना की गई है, जहां 4 डॉक्टर, 4 पशुधन प्रसार अधिकारी और 2 पशुधन सहायकों की तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर कुल 6 गीजर भी स्थापित किए गए हैं ताकि खच्चरों को थकावट से राहत दी जा सके।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केदारनाथ मार्ग पर सोनप्रयाग, गौरीकुंड, भीमबली, लिंचौली और रुद्रप्वाइंट में कुल 5 प्रीपेड बुकिंग काउंटर बनाए गए हैं। वहीं यमुनोत्री यात्रा के लिए जानकीचट्टी में जिला पंचायत द्वारा प्रीपेड काउंटर की व्यवस्था की गई है। वहां नंबर युक्त जैकेट्स के माध्यम से खच्चर संचालकों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है। नियम के अनुसार एक घोड़ा-खच्चर एक दिन में केवल एक बार धाम तक यात्रा कर सकेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल पूरी तरह स्वस्थ घोड़े-खच्चरों को ही यात्रा मार्ग पर भेजा जाए और मार्ग में भी नियमित रूप से उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं की यात्रा न केवल सफल बल्कि सुरक्षित और आरामदायक भी हो।

देवभूमि खबर

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