सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांवों में उल्लेखनीय बदलाव आया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य संबंधित सांसद की देख-रेख में चुनी हुई ग्राम पंचायतों के जीवन स्तर में सुधार लाना था। योजना के तहत सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच में सुधार और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है ताकि ये गांव पड़ोस की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए आदर्श उदाहरण पेश कर सकें। सांसद आदर्श ग्राम योजना में ग्राम विकास योजना के तहत 19,732 नई परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है और 7,204 परियोजनाएं लागू की जा रही हैं।
703 सांसदों ने ग्राम पंचायतों का चयन किया है और इन पंचायतों में समुदाय की सह-भागिता से सम्पूर्ण विकास पर ध्यान केन्द्रित है। कई राज्यों में राज्य सरकारें कार्यक्रमों को लागू करने में मदद कर रही हैं जिससे सामाजिक विकास के सूचकांकों में सुधार देखने को मिल रहा है। आईसीडीएस केंद्रों में 100 प्रतिशत पंजीयन, खुले में शौच से 100 प्रतिशत मुक्ति, 100 प्रतिशत संक्रमण से बचाव के प्रयास शामिल हैं। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, सिक्किम, तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने कार्यक्रमों को तेजी से लागू किया है। अन्य राज्यों ने भी चुनी हुई पंचायतों में जीवन स्तर में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। सांसद आदर्श ग्राम योजना में शामिल गांवों में संक्रमण से बचाव, किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने, महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और नए जनधन खाते खुलवाने में 13 से 19 प्रतिशत तक की वृद्धि आई है।

