राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026: देहरादून में वाहन दुर्घटना क्रैश इन्वेस्टिगेशन पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण, सड़क सुरक्षा को लेकर साझा जिम्मेदारी पर जोर

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026: देहरादून में वाहन दुर्घटना क्रैश इन्वेस्टिगेशन पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण, सड़क सुरक्षा को लेकर साझा जिम्मेदारी पर जोर
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देहरादून ।राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के अंतर्गत परिवहन विभाग, उत्तराखंड द्वारा देहरादून में वाहन दुर्घटना क्रैश इन्वेस्टिगेशन (Vehicle Accident Crash Investigation) विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों की पहचान कर प्रभावी रोकथाम की दिशा में ठोस कदम उठाना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी, देहरादून (अध्यक्ष, जिला सड़क सुरक्षा समिति) ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में  कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल (वन, तकनीकी शिक्षा, भाषा एवं निर्वाचन विभाग) उपस्थित रहे। इस अवसर पर विधायक कैंट सुश्री सविता कपूर, अपर परिवहन आयुक्त श्री सनत कुमार सिंह, संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री राजीव कुमार मेहरा सहित परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, शिक्षा, नगर निगम, एमडीडीए, वन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला सूचना अधिकारी एवं सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी के अधिकारीगण मौजूद रहे।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या कोविड महामारी के दौरान हुई मौतों से भी अधिक है, जो अत्यंत गंभीर सामाजिक चुनौती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि सभी विभागों, संस्थाओं और स्वयं सड़क उपयोगकर्ताओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। वैज्ञानिक दुर्घटना जांच, डेटा-आधारित निर्णय और विभागीय समन्वय को उन्होंने सड़क सुरक्षा की आधारशिला बताया।

मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यातायात दबाव और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा है। उन्होंने ओवरस्पीडिंग को सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताते हुए दोपहिया वाहन चालकों एवं पिलियन राइडर दोनों के लिए हेलमेट के अनिवार्य उपयोग और यातायात नियमों के सख्त पालन पर विशेष बल दिया।

विधायक कैंट सुश्री सविता कपूर ने कहा कि अनधिकृत अतिक्रमण, सड़कों पर निजी सामान रखना और गलत स्थानों पर वाहन खड़ा करना दुर्घटनाओं को बढ़ावा देता है। उन्होंने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग को अत्यंत खतरनाक बताते हुए नागरिकों से जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की।

अपर परिवहन आयुक्त श्री सनत कुमार सिंह ने कहा कि दुर्घटना जांच का उद्देश्य केवल दोष निर्धारण नहीं, बल्कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनका समाधान करना है। उन्होंने बताया कि मानव त्रुटि, वाहन इंजीनियरिंग और सड़क इंजीनियरिंग—तीनों में से कोई भी या सभी कारक दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। प्रत्येक जनपद में वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर मजबूत डेटा बेस विकसित करने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया।

कार्यक्रम में Integrated Road Accident Database (iRAD) के आंकड़ों के आधार पर देहरादून जनपद में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सुधार को भी प्रस्तुत किया गया। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 11.94 प्रतिशत तथा घायलों की संख्या में 5.57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि मृतकों की संख्या में वृद्धि को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए ओवरस्पीडिंग नियंत्रण, हेलमेट एवं सीट बेल्ट अनुपालन तथा त्वरित आपात चिकित्सा प्रतिक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।

प्रशिक्षण सत्र में JPRI प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञ श्री सुमित ढुल ने वाहन दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। साथ ही सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी के श्री नरेश संगल ने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति की भूमिका एवं दायित्वों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री राजीव कुमार मेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा, वैज्ञानिक दुर्घटना जांच, प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

परिवहन विभाग, उत्तराखंड ने इस अवसर पर दोहराया कि वैज्ञानिक जांच, विभागीय समन्वय, डेटा-आधारित नीति और जनभागीदारी के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाकर उत्तराखंड को सुरक्षित एवं जिम्मेदार परिवहन व्यवस्था वाला राज्य बनाया जाएगा।

देवभूमि खबर

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