उत्तराखंड में आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की समीक्षा बैठक, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य दरों में सुधार पर विशेष जोर
देहरादून।उत्तराखंड में आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की समीक्षा बैठक का आयोजन आज वर्चुअल माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड के निदेशक डॉ. मनु जैन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस बैठक में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चिन्हित छह आकांक्षी ब्लॉकों की प्रगति की समीक्षा की गई। ये छह ब्लॉक हैं: अल्मोड़ा जिले का सल्ट, उत्तरकाशी का मोरी, हरिद्वार का बहादराबाद, ऊधम सिंह नगर का गदरपुर, पौड़ी गढ़वाल का दुगड्डा और बागेश्वर का कपकोट।
बैठक में राज्य के सहायक निदेशक मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, सीनियर कंसल्टेंट मातृ स्वास्थ्य के साथ जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी मातृ एवं बाल स्वास्थ्य द्वारा प्रतिभाग किया गया।
बैठक में डॉ. मनु जैन ने मातृ मृत्यु अनुपात और शिशु मृत्यु दर को कम करने की प्राथमिकता पर जोर दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का प्रमुख लक्ष्य है इन आकांक्षी ब्लॉकों के जिलों में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए योजनाबद्ध कार्य करना। इसके तहत उन्होंने तीन प्रमुख लक्ष्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया।गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण और गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में संस्थागत प्रसव को सुनिश्चित करना।90% से अधिक संस्थागत प्रसव की उपलब्धता।2500 ग्राम से कम वजन वाले नवजात शिशुओं की संख्या को 10% से नीचे लाना
इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डॉ. जैन ने कई रणनीतिक उपायों पर चर्चा की। इनमें प्रमुख रूप से गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, संस्थागत प्रसव के बेहतर जागरूकता अभियानों, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की आपूर्ति, आयरन-फोलिक एसिड के वितरण और स्वास्थ्य सेवाओं की रिपोर्टिंग में सुधार शामिल है।
इसके अलावा, उन्होंने मातृ स्वास्थ्य के समग्र विकास के लिए सामुदायिक जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया। इस संबंध में उन्होंने सभी विभागों के साथ समन्वय और मातृ स्वास्थ्य की रिपोर्टिंग और कार्य की समीक्षा प्रणाली को ब्लॉक और जिला स्तर पर मजबूत करने के निर्देश दिए।
डॉ. जैन ने बैठक के दौरान उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, गर्भावस्था के दौरान हेमोग्लोबिन की जांच, और प्रसव के बाद महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने पोषण और आयरन-फोलिक एसिड की आपूर्ति के महत्व को दोहराया और कहा कि इनकी प्रभावी तरीके से उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के फोकस क्षेत्र के तहत चिन्हित छह आकांक्षी ब्लॉकों की नियमित समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा में असाधारण कार्य करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, जिला प्रबंधकों और अन्य संबंधित अधिकारियों को पुरस्कृत करने की भी योजना बनाई गई है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके।
अंत में, डॉ. जैन ने अन्य विभागों के साथ समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जा सकेगा। इससे राज्य में मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मानकों को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

