रिवायत-ए-रेशम फैशन शो में दिखी दून सिल्क की रेशमी चमक, सात दिवसीय एक्सपो में सवा करोड़ से अधिक की बिक्री

देहरादून।उत्तराखंड रेशम फेडरेशन की ओर से आयोजित सात दिवसीय ‘रिवायत-ए-रेशम’ सिल्क एक्सपो का सोमवार को समापन हुआ। समापन समारोह में सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिरकत की। एक्सपो के दौरान आयोजित फैशन शो में बीएस नेगी महिला पॉलिटेक्निक की फैशन डिजाइनिंग की छात्राओं ने रेशमी परिधानों में रैंप वॉक कर पारंपरिक रेशम की विरासत और आधुनिक फैशन का आकर्षक संगम प्रस्तुत किया।
फैशन शो में छात्राओं ने उत्तराखंड रेशम फेडरेशन की रेशमी साड़ियों, मफलर, शॉल सहित विभिन्न रेशमी परिधानों को पहनकर रैंप वॉक किया। पारंपरिक रेशम को आधुनिक परिधान शैली में प्रस्तुत करने की इस पहल ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से रेशम को केवल पारंपरिक वस्त्र तक सीमित न रखते हुए आधुनिक फैशन की नई पहचान देने का प्रयास किया।
14 राज्यों के रेशम उत्पाद रहे आकर्षण का केंद्र
सात दिवसीय सिल्क एक्सपो में देश के 14 राज्यों के रेशम बुनकरों एवं उत्पादकों ने अपने स्टॉल लगाए। समापन अवसर पर सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और बुनकरों एवं रेशम उत्पादकों से उनके उत्पादों, उत्पादन प्रक्रिया तथा विपणन व्यवस्था की जानकारी ली।
उन्होंने एक्सपो में खरीदारी करने पहुंचे लोगों से भी संवाद कर रेशम उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत, डिजाइन और उपलब्धता के संबंध में फीडबैक लिया। विभिन्न राज्यों से आए बुनकरों एवं उत्पादकों ने देहरादून में रेशम उत्पादों को मिले बेहतर प्रतिसाद पर प्रसन्नता जताई।
सात दिवसीय एक्सपो के दौरान सवा करोड़ रुपये से अधिक के सिल्क उत्पादों की बिक्री हुई। इससे देश के विभिन्न राज्यों से आए बुनकरों और रेशम उत्पादकों को देहरादून में बेहतर बाजार मिला। वहीं, स्थानीय उपभोक्ताओं को एक ही स्थान पर अलग-अलग राज्यों के उच्च गुणवत्ता वाले रेशमी उत्पाद खरीदने का अवसर मिला।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड रेशम फेडरेशन वर्तमान में दो करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सिल्क एक्सपो जैसे आयोजनों से विभिन्न राज्यों में रेशम उत्पादन और बुनाई की तकनीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। साथ ही बुनकरों एवं उत्पादकों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध होता है।
उन्होंने कहा कि रेशम क्षेत्र में रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक संभावनाएं हैं। सरकार द्वारा इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे आयोजन लगातार किए जा रहे हैं, जिससे रेशम उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही बुनकरों और उत्पादकों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके।
बीएस नेगी पॉलिटेक्निक वूमेन कॉलेज की प्राचार्य डॉ. नमिता अंबानी ने आयोजन के लिए उत्तराखंड रेशम फेडरेशन एवं प्रदेश सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से फैशन डिजाइनिंग के छात्र-छात्राओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। साथ ही पारंपरिक वस्त्रों को आधुनिक फैशन के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध होता है।
कार्यक्रम में रेशम फेडरेशन के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला, निदेशक रेशम प्रदीप कुमार, अजीत सिंह, रेशम फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष मातवर सिंह कंडारी सहित रेशम विभाग एवं फेडरेशन के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
