दून विश्वविद्यालय में मालदीव के सिविल सेवा अधिकारियों का अध्ययन भ्रमण, सुशासन और तकनीक पर हुआ मंथन

देहरादून। दून विश्वविद्यालय में 28 अक्टूबर 2026 को मालदीव के सिविल सेवा आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और मालदीव के बीच सुशासन, लोक प्रशासन, प्रशासनिक सुधार, शिक्षा तथा सरकारी सेवाओं में प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़े अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत एवं परिचय सत्र के साथ हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी संवाद के माध्यम से प्रशासनिक और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार साझा किए। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल और मालदीव के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने एक-दूसरे को स्मृति-चिह्न भेंट किए। इस पहल को दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के दृष्टिकोण, महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और व्यावहारिक कौशल विकास को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख आवश्यकताएं बताया। उन्होंने कहा कि मालदीव अपनी उच्च शिक्षा प्रणाली में बहुविषयक शिक्षण, कौशल आधारित शिक्षा, अनुसंधान, डिजिटल अध्ययन और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा ले सकता है। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग, संकाय एवं विद्यार्थी आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से इस मॉडल को मालदीव की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के प्रमुख सत्र में कर्मचारी चयन आयोग के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, आईएएस ने “शासन में प्रौद्योगिकी का उपयोग : ऑनलाइन मूल्यांकन एवं परीक्षा संचालन” विषय पर तकनीकी व्याख्यान दिया। उन्होंने परीक्षा संचालन को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित प्रणाली ‘सुचिता’ की प्रमुख विशेषताओं को समझाया। साथ ही डिजिटल निगरानी, आधार आधारित प्रमाणीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
मालदीव के सिविल सेवा आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद मुज्ताज़ ने प्रशासनिक सहयोग और आपसी अनुभवों से सीखने के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने दोनों देशों के बीच प्रशासनिक अनुभव साझा करने और सहयोग को मजबूत बनाने की आवश्यकता रेखांकित की।
कार्यक्रम का समापन दून विश्वविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बी. एस. बिष्ट के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके बाद समूह छायाचित्र लिया गया।
यह अध्ययन भ्रमण भारत और मालदीव के बीच प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान, संस्थागत सहयोग और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। इससे दोनों देशों में अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।


